हैदराबाद , जनवरी 30 -- पद्मश्री पुरस्कार विजेता और जानी-मानी बाल अधिकार कार्यकर्ता शांता सिन्हा ने जोर देकर कहा कि स्कूल नहीं जाने वाले हर बच्चे को बाल मजदूर माना जाना चाहिए। उन्होंने इसे समाज की एक गंभीर विफलता बताया।
सुश्री सिन्हा तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में सिस्टर निवेदिता स्कूल के 36वें वार्षिक सांस्कृतिक मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थीं। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि माता-पिता की जिम्मेदारी केवल बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "बच्चे किसी भी परिवार की सबसे मूल्यवान संपत्ति होते हैं। उनके बचपन की रक्षा करना, उनकी जिज्ञासा को बढ़ाना और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना एक साझा जिम्मेदारी है।"सामाजिक कार्यकर्ता ने बच्चों को मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि घर और स्कूल में स्क्रीन तक अनियंत्रित पहुंच उनके मानसिक स्वास्थ्य और रचनात्मकता पर बुरा असर डाल सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को एक स्वतंत्र और सहायक वातावरण में विकसित होना चाहिए, जो वास्तविक जीवन के अनुभवों और सार्थक यादों से समृद्ध हो।
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