काबुल , दिसंबर 17 -- अफगानिस्तान में छठी कक्षा से आगे लड़कियों के स्कूल और यूनिवर्सिटी बंद होने के कारण एक लाख से ज्यादा महिलाओं ने हस्तशिल्प की ओर रुख़ किया है। अफ़गानिस्तान के समाचार चैनल तुलु न्यूज़ ने एक रिपोर्ट में यह दावा किया है।

तुलु न्यूज़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई महिलाएं 'नया कौशल सीखकर और सम्मानजनक रोज़गार कमाकर' खुश हैं, लेकिन वे सरकार से अनुरोध करती हैं कि स्कूल-कॉलेजों को एक बार फिर महिलाओं के लिये खोल दिया जाये ताकि वे अपने लक्ष्यों के लिये काम कर सकें।

स्कूल से वांछित रही रुबीना नाम की महिला के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया, "मैं खुश हूं कि मैंने सिलाई शुरू की। अब मैं अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतें इसके ज़रिये पूरी कर सकती हूं। फिर भी मैं सरकार से अनुरोध करती हूं कि शैक्षणिक संस्थाओं को लड़कियों के लिये खोल दिया जाए ताकि वे पढ़-लिखकर अपने परिवार और देश के लिये काम कर सकें। स्कूल बंद होने के बाद कई लड़कियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा, लेकिन एक बार सिलाई शुरू करने के बाद मैं इन समस्याओं से उबर सकी।"रिपोर्ट में कहा गया कि रोया मोहम्मद भी उन लड़कियों में से एक थी जो स्कूल बंद होने से प्रभावित हुईं, लेकिन अब वह मेहर नाम की एक हस्तशिल्प कंपनी चलाती हैं। व्यवसायिक ट्रेनिंग हासिल करने के बाद बाद वह न सिर्फ इस कंपनी के ज़रिये अपने परिवार को आर्थिक समर्थन दे रही हैं, बल्कि उन्हें कई अन्य महिलाओं और लड़कियों के लिये भी रोज़गार के अवसर पैदा किये हैं।

रोया कहती है, "मैंने स्कूल से पढ़ाई करने के बाद कुछ प्रशिक्षण कोर्स किये, लेकिन दुर्भाग्य से मैं आगे की पढ़ाई नहीं कर पायी। इससे पहले मैं एक साक्षरता कोर्स चलाती थी, लेकिन (प्रतिबंध के बाद) मैं एक छोटी सी कार्यशाला चलाती हूं जहां कई लड़कियां काम करती हैं।"उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने के बाद महिलाओं के लिये स्कूल-कॉलेज बंद हुए चार साल से ज्यादा का समय बीत गया है। नये नियमों के अनुसार, लड़कियां सिर्फ छठी कक्षा तक ही पढ़ाई कर सकती हैं, जबकि विश्वविद्यालयों में उनका प्रवेश निषिद्ध है। इसी वजह से कई लड़कियों ने व्यवसाय का रास्ता चुना है।

महिलाओं के वाणिज्य एवं उद्योग मंडल की अध्यक्ष फ़रीबा नूरी का कहना है कि सिलाई-बुनाई जैसे हस्तशिल्प में महिलाओं की रूचि तेज़ी से बढ़ी है। अब महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार का समर्थन कर रही हैं, बल्कि सकुशल उद्यमी भी बन रही हैं।

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