नयी दिल्ली , दिसंबर 17 -- उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए स्कूलों की ऑफलाइन कक्षाएं बंद करने के दिल्ली सरकार के फैसले पर रोक लगाने से बुधवार को इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचोली की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने की इच्छुक नहीं हैं क्योंकि कक्षाओं का निलंबन केवल एक अस्थायी उपाय है और वैसे भी अगले सप्ताह से स्कूलों में शीतकालीन अवकाश शुरू होने वाले हैं। हालांकि, न्यायालय ने इस मुद्दे को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के विचार के लिए खुला रखा।

आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि स्कूल बंद होने से गरीब परिवार प्रभावित होते हैं क्योंकि बच्चे को दोपहर का भोजन (मिड-डे मील) नहीं मिल पाता। उन्होंने इस निर्णय के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूली बच्चे प्रदूषण में योगदान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई अभिभावक खतरनाक वायु गुणवत्ता के बावजूद बाहर काम कर रहे हैं और घरों के अंदर की हवा भी कक्षाओं की तुलना में अनिवार्य रूप से बेहतर नहीं है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालतें विशेषज्ञों की तरह काम नहीं कर सकतीं और विशेषज्ञों के निर्णयों पर अपील के तौर पर विचार नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि कक्षाओं पर रोक सीमित अवधि के लिए है।

हाइब्रिड लर्निंग (ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों) का विकल्प चाहने वाले अभिभावकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि बच्चों को सुबह तब जल्दी बाहर निकलना पड़ता है जब प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हाइब्रिड मॉडल से भेदभाव हो सकता है क्योंकि जो लोग डिजिटल उपकरण खरीद सकते हैं वे सुरक्षित रहेंगे और जो नहीं खरीद सकते वे प्रदूषण की चपेट में आएंगे।

न्याय मित्र (एमीकस क्यूरी) अपराजिता सिंह ने पीठ को बताया कि सीएक्यूएम के अधिसूचित ग्रैप-चार उपायों के तहत हाइब्रिड कक्षाओं का विचार था, लेकिन दिल्ली सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए पांचवीं कक्षा तक की कक्षाओं को पूरी तरह रोकने का आदेश दिया। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि यह निर्णय 15 दिसंबर को तब लिया गया जब शहर में धुंध की घनी परत छाई हुई थी और वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। उन्होंने कहा कि इस उपाय का उद्देश्य छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और यातायात की भीड़ को कम करना है।

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