नयी दिल्ली , मार्च 29 -- कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को केंद्र सरकार के उन दावों पर सवाल उठाए हैं, जिनमें विलुप्त पक्षी 'सोन चिरैया' (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड या गोडावण) के संरक्षण का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2011 के विजन को दिया जा रहा है।
श्री रमेश ने याद दिलाया कि उन्होंने जून 2010 में ही मौजूदा प्रधानमंत्री एवं गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कच्छ के घास के मैदानों में इस लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया था।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब शनिवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कच्छ के अबडासा क्षेत्र में एक दशक के बाद सोन चिरैया के चूजे के जन्म की घोषणा की। श्री यादव ने इस सफलता का श्रेय 2011 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देखे गए विजन और 2016 में शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट जीआईबी' को दिया।
श्री रमेश ने अपनी पुस्तक 'ग्रीन सिग्नल' का अंश साझा करते हुए बताया कि 9 जून 2010 को उन्होंने मुख्यमंत्री मोदी को पत्र लिखकर 'नालिया' (कच्छ) के चरागाहों को कृषि के लिए उपयोग करने से रोकने का अनुरोध किया था, ताकि सोन चिरैया को विलुप्त होने से बचाया जा सके।
कांग्रेस नेता श्री रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, "हमेशा की तरह, इस पहल का सारा श्रेय प्रधानमंत्री को दिया जा रहा है और यह प्रचारित किया जा रहा है कि यह विचार उन्हें 2011 में आया था। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ सच्चाई जानते हैं।"उन्होंने महान पक्षी विज्ञानी सलीम अली का जिक्र करते हुए कहा कि श्री अली 1961 में इसे 'राष्ट्रीय पक्षी' घोषित करना चाहते थे, लेकिन 1963 में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारणों से मोर को चुना गया।
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