बैतूल , अप्रैल 17 -- जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के बीच पंजीयन व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका सामने आई है। सैटेलाइट सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों के पंजीयन असत्यापित होने से स्लॉट बुकिंग बाधित हो रही है और खरीदी की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

जानकारी के अनुसार इस वर्ष किसानों के पंजीकृत रकबे का सैटेलाइट इमेज के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में कई मामलों में पंजीयन और वास्तविक फसल स्थिति में अंतर पाया गया है, जिसके चलते कई किसानों के पंजीयन असत्यापित कर दिए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक कुछ किसानों द्वारा एक ही भूमि पर सरसों और गेहूं दोनों फसलों का पंजीयन कराए जाने की आशंका है, जबकि कुछ मामलों में गन्ना उत्पादकों द्वारा कम रकबे में गेहूं बोकर अधिक क्षेत्र का पंजीयन कराने की बात भी सामने आ रही है। सैटेलाइट इमेज में कई खेतों में हरियाली दिखाई देने से संदेह और बढ़ गया है।

हालांकि इस प्रक्रिया में वास्तविक किसान भी प्रभावित हो रहे हैं। जिन किसानों ने वास्तव में गेहूं की बोवनी की है, उनके पंजीयन भी असत्यापित हो रहे हैं, जिससे वे स्लॉट बुक नहीं कर पा रहे हैं। इससे खरीदी केंद्रों पर अपेक्षित आवक नहीं हो रही है।

जिले में रबी विपणन वर्ष 2026 के लिए 18 हजार 979 किसानों ने पंजीयन कराया है। नौ अप्रैल से खरीदी शुरू हो चुकी है, लेकिन सर्वर संबंधी समस्याओं और सत्यापन में आ रही बाधाओं के कारण प्रक्रिया धीमी बनी हुई है।

उल्लेखनीय है कि पिछले खरीफ सीजन में भी ज्वार पंजीयन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके चलते इस बार सख्त सत्यापन प्रक्रिया अपनाई गई है। हालांकि इससे वास्तविक किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वर्तमान में खुले बाजार में गेहूं के दाम लगभग 2300 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तथा बोनस सहित लगभग 2625 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। ऐसे में फर्जी पंजीयन की आशंका भी जताई जा रही है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाते हुए वास्तविक किसानों को राहत दी जाए, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके।

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