पटना , फरवरी 17 -- अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (सैक-इसरो) के निदेशक नीलेश एम देसाई ने कहा है कि बिहार सरकार के बिहार मौसम सेवा केंद्र (बीएमएसके) और अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (सैक- इसरो) के बीच बीते तीन वर्षों से प्रभावी सहयोग चल रहा है और इस साझेदारी के तहत बाढ़, भूकंप, वज्रपात, शीतलहर, लू और आंधी- तूफान जैसी आपदाओं के पूर्वानुमान और प्रबंधन पर निरंतर काम किया जा रहा है।
मंगलवार को बिहार विधान परिषद के उपभवन सभागार में आयोजित 'अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और विकास की नई सीमा' विषयक विशेष व्याख्यान में श्री देसाई ने कहा कि पश्चिमी चंपारण और भागलपुर जिलों में डॉप्लर वेदर रडार लगाये जा रहे हैं, जिससे मौसम पूर्वानुमान और आपदा चेतावनी प्रणाली को और सुदृढ़ किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि छठ पूजा जैसे बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन के लिये उपग्रह प्रौद्योगिकी का उपयोग संभव है, वहीं राज्य के विभिन्न शहरों की वायु गुणवत्ता की निगरानी भी की जा सकती है।
श्री देसाई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और निरंतर डेटा विश्लेषण की क्षमता पर प्रकाश डालते हुये कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से 15 दिन पहले ही साइक्लोन और आंधी- तूफान की चेतावनी दी जा सकती है। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखने वाले वैज्ञानिकों सीवी रमण, सतीश धवन और मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम के योगदान को अविस्मरणीय बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना, उद्देश्यों और इसके संस्थापक विक्रम साराभाई के विज़न पर भी विस्तार से जानकारी दी। श्री देसाई ने स्पष्ट किया कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम किसी देश से प्रतिस्पर्धा के लिये नहीं, बल्कि पूरे देश की भलाई और विकास के लिये संचालित है।
कार्यक्रम के समापन पर बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुये कहा कि यह व्याख्यान अत्यंत उपयोगी और प्रेरक रहा। उन्होंने गीत की पंक्तियों, 'अभी ना जाओ छोड़कर, कि दिल अभी भरा नहीं.' के माध्यम से वक्ताओं के प्रति आभार जताया और भविष्य में पुनः परिषद को समय देने का अनुरोध किया।
इस अवसर पर उप-सभापति प्रो. (डॉ.) राम वचन राय, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा सहित विधान परिषद के कई सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
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