नयी दिल्ली , फरवरी 02 -- उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को विभिन्न राज्यों में लागू किए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों की जांच का मार्ग प्रशस्त करते हुए आदेश दिया कि तीन न्यायाधीशों की पीठ उनकी संवैधानिक वैधता पर निर्णय लेगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने नेशनल काउंसिल ऑफ चर्च इन इंडिया (एनसीसीआई) की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि न्यायालय उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई राज्यों द्वारा पारित धार्मिक धर्मांतरण कानूनों को दी गई कई चुनौतियों पर पहले से ही विचार कर रही है।

न्यायालय ने मुद्दे के व्यापक प्रभावों और इसमें शामिल कानून के सामान्य प्रश्नों पर संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया कि मामले को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखा जाए।

न्यायालय ने विभिन्न राज्यों में धर्मांतरण कानूनों को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया और प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर एक साझा जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। महाधिवक्ता तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि केंद्र सरकार का जवाब तैयार है और इसे जल्द ही दाखिल किया जाएगा।

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