बेंगलुरु , फरवरी 03 -- कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री एमसी सुधाकर और दिनेश गुंडू राव ने मंगलवार को प्रस्तावित वीबी जी राम जी अधिनियम की कड़ी आलोचना की और इसे जन-विरोधी तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की भावना को कमजोर करने का प्रयास बताया।
स्वास्थ्य मंत्री सुधाकर ने मीडिया से कहा कि मनरेगा 'बहुत क्रांतिकारी अधिनियम' था। यह ग्रामीण जनसंख्या को कम से कम 100 दिनों के निश्चित रोजगार की गारंटी देता था। इसे दुनिया भर के संगठनों से सराहना मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद इस योजना के लिए धन में व्यवस्थित रूप से कटौती की गयी और कई तरह की पाबंदियां लगायी गयीं।
उन्होंने कहा, "मनरेगा के लिए हर साल बजट का आकार बढ़ाने के बजाय घटा दिया गया। इसके बदले आयी नयी योजना में राज्यों को विश्वास में लिए बिना एकतरफा 40 प्रतिशत राज्य हिस्सेदारी लाने का फैसला किया।" श्री सुधाकर ने योजना के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाने के कदम पर भी कड़ी आपत्ति जतायी और कहा कि गांधी ने विश्वविख्यात अहिंसक आंदोलन के जरिये आजाद भारत को आकार देने में अहम भूमिका निभायी थी।
उन्होंने जोर देकर कहा, "जब ऐसा है तो वे महात्मा गांधी का नाम कैसे हटा सकते हैं? हम एक प्रस्ताव पारित करने जा रहे हैं, जिसमें यह कहा जायेगा कि हमारी राज्य सरकार इसे स्वीकार नहीं करेगी।"कुछ ऐसा ही कर्नाटक मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा। उन्होंने 'वीबी जी राम जी' अधिनियम को पूरी तरह से जन-विरोधी कानून करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा को मजबूत करने के बजाय केंद्र ने पिछले कुछ वर्षों में कमजोर किया है।
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