एमसीबी , फरवरी 14 -- स्वास्थ्य विभाग ने सुदूर वनांचल क्षेत्र के बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर की टीम ने विकासखंड भरतपुर के अंतर्गत दूरस्थ क्षेत्र स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सिंगरौली में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं निःशुल्क नेत्र जाँच शिविर का आयोजन किया।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी मजबूत बनाना था, ताकि वे बिना किसी तनाव के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
जिला पीआरओ से शनिवार को मिली जानकारी के अनुसार,खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर. के. रमन के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर विशेष चर्चा की गई।
आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवपाल सिंह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच जीवन में सफलता की मूलभूत आवश्यकताएं हैं। उन्होंने बच्चों को मानसिक तनाव से बचने के उपाय बताते हुए दिनचर्या में योग और ध्यान को शामिल करने की सलाह दी।
इसके अतिरिक्त, शिविर में विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं परामर्श की भी व्यवस्था की गई। आर. एस. चेचाम द्वारा आधुनिक उपकरणों की सहायता से बच्चों की आँखों की विस्तृत जाँच की गई। जिन बच्चों में दृष्टि दोष या किसी अन्य नेत्र संबंधी समस्या के लक्षण पाए गए, उन्हें तुरंत आवश्यक परामर्श देकर सावधानी बरतने और समय पर उपचार कराने की सलाह दी गई, ताकि भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं से बचा जा सके।
पूरे कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक सुलेमान खान ने किया। उनके बेहतर समन्वय और कुशल प्रबंधन के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी बिना किसी परेशानी के इन निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सके।
शाला प्रबंधन समिति और उपस्थित अभिभावकों ने स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में इस तरह के शिविर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी यह संकल्प दोहराया है कि भविष्य में विकासखंड के अन्य सुदूर और वनांचल क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं हर बच्चे तक पहुँच सकें।
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