जालंधर , अप्रैल 07 -- पंजाब के पूर्व विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला ने मंगलवार को कहा कि श्री सुखबीर बादल का यह कहना कि 02 दिसंबर 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब की फसील (मुंडेर) से हुए आदेश एक साजिश थे और उन्हें मरवाने की कोशिश थी, यह दर्शाता है कि एक कथित पंथक पार्टी का अध्यक्ष होने के बावजूद वे श्री अकाल तख्त साहिब के इतिहास, परंपराओं और मर्यादा से पूरी तरह अनजान हैं।
श्री वडाला ने कहा कि दो दिसंबर को सेवा के दौरान अकाली सरकारों पर लगे सभी आरोप गुरु की कृपा से धोए जा सकते थे, बशर्ते सुखबीर सब कुछ सिर झुकाकर स्वीकार करते। लेकिन उन्होंने मुक्तसर की धरती पर जाकर सब कुछ नकार दिया। इस तरह, 'टूटी गांठने' (क्षमा करने) वाले गुरु की धरती पर जाकर वे फिर से गुरु को 'बेदावा' (त्याग पत्र) दे बैठे। उन्होंने कहा कि सुखबीर को आत्ममंथन करना चाहिए। यदि उन्होंने सच्चे मन से दोष स्वीकार किए होते, तो गुरु रामदास जी ने उनकी रक्षा की और उन पर चली गोली उन्हें छू भी नहीं सकी। लेकिन उनके चेलों ने वाहेगुरु का शुक्रिया अदा करने के बजाय यह आरोप लगाना शुरू कर दिया कि दरबार साहिब पर गोली चली है। उन्होंने कहा कि यदि सुखबीर विनम्रता के साथ संगत से माफी मांग लेते, तो सहानुभूति की लहर चल पड़ती। लेकिन वे अहंकार के घोड़े पर सवार होकर धार्मिक सजा भुगतने के लिए भी सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचते रहे।
श्री वडाला ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब सुखबीर अहंकार में श्री अकाल तख्त के जत्थेदार को धमकाने गए थे, तब वे सचिवालय में कुर्सी से गिर गए और उनकी टांग टूट गई थी। उन्हें इन प्रत्यक्ष उदाहरणों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन सिंह साहिबान को सुखबीर 'रुलते हुए' (भटकते हुए) बता रहे हैं, उनका संगत हर जगह सम्मान करती है। इसके विपरीत, अहंकारी सुखबीर को अपनी बातें सुनाने के लिए आज भी पैसे और शराब देकर भीड़ इकट्ठी करनी पड़ती है-यह 'रब की मार' है।
उन्होंने संगत से श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के अनुसार अकाली दल के साथ जुड़ने की अपील की, ताकि ऐसे अहंकारी लोगों को पंथक आंगन से हमेशा के लिए बाहर किया जा सके।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित