रांची , मार्च 10 -- केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के अर्थशास्त्र एवं विकास अध्ययन विभाग द्वारा "अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार और भारत की विकास क्षमता: क्षेत्रवार प्रभाव और नीतिगत दृष्टिकोण" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई।
सम्मेलन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों और जीएसटी अधिकारियों ने भाग लेकर जीएसटी के बदलते स्वरूप और भारत की आर्थिक प्रगति में उसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. संहिता सुचरिता के स्वागत भाषण से आज हुई। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक नीति और विकास के लिए जीएसटी सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जीएसटी ने कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
सम्मेलन के सम्मानित अतिथि हैदराबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. जे. वी. एम. शर्मा ने भारत में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कर अनुपालन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बदलते आर्थिक परिवेश के अनुसार जीएसटी में निरंतर सुधार आवश्यक हैं।
जीएसटी विभाग की ओर से सहायक आयुक्त सुबोध कुमार (जीएसटी, झारखंड) ने उत्पादकों और निर्माताओं के बीच जीएसटी के क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधार 2.0 विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ कर चोरी जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी।
वहीं सहायक आयुक्त आत्मचैतन्य चौधरी (जीएसटी, झारखंड) ने कर प्रणाली के सरलीकरण और तार्किकीकरण पर बल देते हुए कहा कि इससे भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि भारत आज दूध और जूट उत्पादन में विश्व में प्रथम तथा चावल और खाद्य उत्पादन में द्वितीय स्थान पर है, जो देश की मजबूत उत्पादन क्षमता को दर्शाता है।
मुख्य अतिथि मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रो. एन. आर. भानुमूर्ति ने कहा कि जीएसटी ने भारत की कर प्रणाली को अधिक सरल और न्यायसंगत बनाया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7.4 प्रतिशत है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों ने निजी उपभोग, निजी निवेश और श्रम प्रधान क्षेत्रों जैसे विनिर्माण तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को प्रोत्साहन दिया है।
अध्यक्षीय संबोधन में सीयूजे के सांख्यिकी एवं डेटा साइंस विभाग के अध्यक्ष प्रो. के. बी. पांडा ने जीएसटी को आर्थिक विकास को गति देने वाला महत्वपूर्ण सुधार बताया। उन्होंने कहा कि जीएसटी राजस्व में एक प्रतिशत वृद्धि से लगभग 0.56 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि संभव है।
सम्मेलन के पूर्ण सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. रंजन कुमार मोहंती (सहायक प्रोफेसर, जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट) ने जीएसटी की मूल अवधारणा, इसकी विभिन्न कर श्रेणियों तथा आईजीएसटी, सीजीएसटी और एसजीएसटी जैसे घटकों की विस्तृत जानकारी दी।
वहीं विशिष्ट अतिथि प्रो. नारायण सेठी (अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, एनआईटी राउरकेला) ने जीएसटी के वित्तीय समावेशन और आम लोगों के कल्याण पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा करते हुए अपने शोध अध्ययनों के निष्कर्ष भी साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में अर्थशास्त्र एवं विकास अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार मेहर ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
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