नयी दिल्ली , फरवरी 07 -- भारतीय रेल ने कहा है कि थोक सीमेंट परिवहन को लेकर रेलवे की ओर से किये गये सुधारों, टैंक कंटेनर के इस्तेमाल और शुल्क में रियायत जैसे उपायों के सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं।
रेलवे ने सीमेंट की लदान की सीमा बढ़ाने, रेल आधारित आवाजाही को बढ़ावा देने और सकल टन-किलोमीटर (जीटीकेएम) आधार पर शुल्क में कटौती जैसे उपाय किये हैं। रेलवे ने हाल ही में जीटीकेएम आधार पर चार्जिंग को 90 पैसे से घटाकर 85 पैसे प्रति टन प्रति किलोमीटर किया था।
रेलवे की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन पहलों के बाद कई सीमेंट कंपनियों ने टैंक कंटेनरों में थोक सीमेंट भेजने के लिए कॉनकॉर से संपर्क किया है। सीमेंट की थोक खेप संभालने और भंडारण के लिए कॉनकॉर अपने टर्मिनलों में साइलो स्थापित करने की सुविधा भी प्रदान कर रहा है।
रेलवे के अनुसार जीटीकेएम आधार पर मूल टर्मिनल पर खाली वापसी के लिए छूट के साथ-साथ टैंक कंटेनरों में थोक सीमेंट की लदान की सुविधा के कारण रेल आवाजाही सड़क की तुलना में काफी अधिक प्रतिस्पर्धी हो रही है। रेलवे टैंक कंटेनरों में थोक सीमेंट के परिवहन के लिए दूरी स्लैब के अनुसार प्रति बीस-फुट समकक्ष इकाई (टीईयू) आधार पर शुल्क ले रहा था, जिसमें वापसी के समय टैंक कंटेनरों के खाली रहने पर श्रेणीबद्ध तरीके से छूट दी जाती थी। यह छूट पहले वर्ष में 50 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 40 प्रतिशत, तीसरे वर्ष में 30 प्रतिशत, चौथे वर्ष में 20 प्रतिशत और पांचवें वर्ष में 10 प्रतिशत रखने की व्यवस्था थी। छठे वर्ष से छूट को पूरी तरह समाप्त किया जाना था।
रेलवे के अनुसार यह शुल्क प्रणाली सीमेंट उत्पादकों को आकर्षित नहीं कर पायी थी। टैंक कंटेनरों में थोक सीमेंट के रेल आधारित परिवहन को बढ़ावा देने और लदान बढ़ाने के उद्देश्य से रेलवे ने दरों में सुधार किये हैं ताकि रेलवे और ग्राहकों दोनों के लिए लाभकारी स्थिति बनाई जा सके।
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