नयी दिल्ली , अप्रैल 03 -- कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान एक और क्यूआर कोड विवाद में फंसने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने परामर्श जारी किया है। इसमें विद्यार्थियों, अभिभावकों और मीडिया को प्रश्नपत्रों पर छपे क्यूआर कोड से जुड़ी 'भ्रामक सूचनाओं' के प्रति आगाह किया गया है।
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि ये क्यूआर कोड प्रमाणीकरण, ट्रैकिंग और परीक्षा की शुचिता बनाये रखने के लिए उसकी आंतरिक प्रणाली का हिस्सा हैं, न कि कोई क्लिक करने योग्य वेब लिंक।
गुरुवार देर रात जारी परामर्श में बोर्ड ने कहा, " स्कैन करने पर ये वेब लिंक के रूप में नहीं खुलते हैं। केवल निर्धारित टेक्स्ट ही प्रदर्शित करते हैं। "यह स्पष्टीकरण सोशल मीडिया पर उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि क्यूआर-जनरेटेड कोड को ऑनलाइन मैन्युअल सर्च करने पर व्यक्तियों के संदर्भ सहित असंबंधित परिणाम सामने आ रहे हैं।अधिकारियों ने आगे बताया कि जब मानक एप्लिकेशन या क्रोम जैसे ब्राउजर से इन्हें स्कैन किया जाता है, तो कोड कोई अवांछित सामग्री नहीं दिखाते। परामर्श में हालांकि बताया गया है कि यदि उपयोगकर्ता उस टेक्स्ट को गूगल सर्च पर खोजते हैं, तो सर्च इंजन असंबंधित सुझाव उत्पन्न कर सकता है।
यह स्पष्टीकरण उन ऑनलाइन चर्चाओं के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया था कि क्यूआर कोड स्कैन करने पर, विशेष रूप से 30 मार्च को आयोजित कक्षा 12 के इतिहास के पेपर में इन्फ्लुएंसर 'ओरी' से जुड़े सर्च परिणाम सामने आये।
सोशल मीडिया पर प्रसारित और एक भारतीय मीडिया संस्थान के सत्यापित वीडियो के अनुसार, जब छात्रों ने उस अस्पष्ट टेक्स्ट को ऑनलाइन सर्च किया, तो सर्च इंजन ने उसे ऑटो-करेक्ट कर 'ओरी' कर दिया, जिससे असंबंधित परिणाम दिखाई देने लगे।
ओरी ने एक अप्रैल को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर इस घटना पर मजाक करते हुए इसे राष्ट्रीय परीक्षा पत्र में शामिल होने का 'अत्यंत बड़ा और उचित सम्मान' बताया। उन्होंने कहा कि वह 'साहित्यिक और रूपक, दोनों तरह से भारतीय इतिहास का हिस्सा बनकर सम्मानित' महसूस कर रहे हैं।
परामर्श में इस बात पर जोर दिया गया कि इस तरह के परिणाम सर्च इंजन के 'एल्गोरिदम-आधारित आउटपुट' हैं और इनका सीबीएसई या उसकी परीक्षा प्रक्रियाओं से कोई संबंध नहीं है। सीबीएसई ने आगे कहा कि कुछ तत्व बोर्ड को बदनाम करने और 'झूठा प्रचार' करने के लिए जानबूझकर असंबंधित सर्च परिणामों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। परामर्श में कहा गया कि क्यूआर कोड को असंबंधित व्यक्तियों या सामग्री से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
बोर्ड ने जनता से असत्यापित दावों को साझा करने से बचने और केवल आधिकारिक संचार माध्यमों पर भरोसा करने का आग्रह किया। बोर्ड ने कहा, "संस्थागत विश्वसनीयता को धूमिल करने वाली सामग्री को बढ़ावा देने से बचें।"बोर्ड ने जिम्मेदार तरीके से सूचना साझा करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि परीक्षा प्रणालियों में जनता का विश्वास बनाये रखने के लिए केवल सत्यापित और तथ्यात्मक विवरण ही प्रसारित किये जाने चाहिए।यह कोई इकलौती घटना नहीं है। इससे पहले नौ मार्च को कक्षा 12 के गणित के प्रश्नपत्र पर अंकित क्यूआर कोड पर उपयोगकर्ताओं को रिक एस्टली के 1987 के हिट गाने 'नेवर गोन्ना गिव यू अप' के यू-ट्यूब वीडियो पर ले गया था- यह गाना 'रिकरोलिंग' के नाम से मशहूर एक पुराने इंटरनेट प्रैंक का हिस्सा है। दस मार्च को सीबीएसई ने परीक्षा की शुचिता को लेकर चिंताओं को खारिज करते हुए प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि प्रश्नपत्र पूरी तरह असली थे। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, "प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है।"बोर्ड ने कहा कि यह समस्या प्रश्नपत्रों के केवल कुछ सेटों में ही हुई, जिसमें एक क्यूआर कोड स्कैन करने पर वह वीडियो खुल रहा था।
2019 में एक बड़े पेपर लीक के बाद जब परीक्षा से पहले कक्षा 12 के अर्थशास्त्र और कक्षा 10 के गणित के पेपर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गये थे, सीबीएसई ने सुरक्षा उपाय के रूप में प्रश्नपत्रों पर क्यूआर कोड की शुरुआत की थी।
तब कक्षा 12 की अर्थशास्त्र की परीक्षा दोबारा आयोजित की गयी थी, जबकि कक्षा 10 की गणित की परीक्षा दोबारा नहीं हुई थी। बोर्ड का तर्क था कि लीक का दायरा सीमित था और कई छात्र परीक्षा दे चुके थे।
प्रश्नपत्र में अंकित प्रत्येक क्यूआर कोड में विषय, परीक्षा की तारीख, पेपर सेट और प्रिंटिंग बैच जैसी जानकारी होती है, जो एक डिजिटल पहचानकर्ता के रूप में कार्य करती है। ये पहचानकर्ता अधिकारियों को वितरण शृंखला पर नजर रखने और लीक होने की स्थिति में स्रोत का पता लगाने में मदद करते हैं।
जब एक सामान्य मोबाइल फोन से स्कैन किया जाता है, तो ये कोड आमतौर पर एक कूटबद्ध शृंखला या अल्फ़ान्यूमेरिक डाटा प्रदर्शित करते हैं, जो सीबीएसई के आंतरिक डेटाबेस से जुड़ा होता है, जिसे केवल अधिकृत सिस्टम ही पेपर की उत्पत्ति को सत्यापित करने के लिए डिकोड कर सकते हैं।
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