नयी दिल्ली , दिसंबर 15 -- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ऑपरेशन चक्र-वी के तहत साइबर अपराध अवसंरचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार को दिल्ली-एनसीआर और चंडीगढ़ में एक फिशिंग एसएमएस फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

सीबीआई ने एक बयान में यह जानकारी दी कि उसने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है जिसका इस्तेमाल पूरे देश में फिशिंग संदेश भेजने के लिए किया जा रहा था। सीबीआई ने दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ में कई स्थानों पर छापेमारी के बाद सोनवीर सिंह, मनीष उप्रेती और हिमालय को गिरफ्तार किया।

बयान में कहा गया है कि इन संदेशों के माध्यम से लोगों फर्जी डिजिटल अरेस्ट, ऋण और निवेश धोखाधड़ी जैसे विभिन्न साइबर धोखाधड़ी जाल में फंसाया जाता था। ऑपरेशन चक्र-वी का उद्देश्य भारत में साइबर अपराध की अवसंरचना को समाप्त करना है ।इसके अंतर्गत सीबीआई ने लोगों को प्रतिदिन प्राप्त होने वाले भारी संख्या में फर्जी एसएमएस संदेशों का अध्ययन किया, जो अक्सर उन्हें गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बनाते हैं। जांच के दौरान, सीबीआई ने एनसीआर, चंडीगढ़ क्षेत्र में सक्रिय एक संगठित साइबर गिरोह का पता लगाया। यह गिरोह साइबर अपराधियों को बल्क एसएमएस सेवाएं प्रदान कर रहा था। यह भी पता चला है कि विदेशी साइबर अपराधी भी भारतीय लोगों को ठगने के लिए इस सेवा का उपयोग कर रहे थे।

बयान के मुताबिक शुरुआती जांच में पता चला कि लगभग 21,000 सिम कार्ड दूरसंचार विभाग के नियमों का उल्लंघन करते हुए प्राप्त किए गए थे। इन सिम कार्डों को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नियंत्रित किया जाता था जिसका उपयोग थोक संदेश भेजने के लिए किया जाता था। इन संदेशों में फर्जी ऋण, निवेश और अन्य वित्तीय लाभों की पेशकश की जाती थी जिसका उद्देश्य भोले-भाले लोगों की व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी चुराना था।

दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर और संचार साथी पोर्टल सहित विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी का उपयोग करते हुए, सीबीआई ने एक निजी कंपनी, मेसर्स लॉर्ड महावीर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिस पर उपरोक्त अवैध प्रणाली चलाने का आरोप है जिसके माध्यम से धोखेबाजों को पूरे भारत में लोगों को बड़ी संख्या में फर्जी संदेश भेजने की सुविधा मिलती थी। दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इन तलाशी अभियानों के दौरान सीबीआई को फिशिंग संदेश भेजने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक पूर्ण और सक्रिय संरचना मिला। इसमें सर्वर, संचार उपकरण, यूएसबी हब, डोंगल और हजारों सिम कार्ड शामिल थे।

सीबीआई ने इस अभियान के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत, बेहिसाब नकदी और क्रिप्टोकरेंसी जब्त की। शुरुआती जांच में दूरसंचार कंपनियों के कुछ चैनल पार्टनर और उनके कर्मचारियों की संलिप्तता का भी संकेत मिला है जिन्होंने इस धोखाधड़ी के लिए अवैध रूप से सिम कार्ड की व्यवस्था करने में मदद की।

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