अलवर , फरवरी 07 -- राजस्थान में अलवर जिले की अरावली की वादियों में स्थित सिलीसेढ़ झील को रामसर आर्द्रभूमि घोषित होने के बाद शनिवार को पहली बार झील पर पक्षी उत्सव आयोजित किया गया।
इस दौरान शनिवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उत्सव की शुरुआत की। इस मौके पर हजारों स्कूली बच्चों ने झील के आसपास मौजूद 200 से ज्यादा प्रजातियां के पक्षियों को दिखा। पक्षियों को देखकर स्कूली बच्चे खासे खुश नजर आए।
अरावली की पहाड़ियों के बीच सिलीसेढ़ झील अपनी सुंदरता के लिए खास पहचान रखती है। वर्षभर इस झील में पानी रहता है। तो हमेशा देशी विदेश पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं और नौकायन का आनंद लेते हैं। सिलीसेढ़ झील को इस वर्ष रामसर साइट में शामिल करते हुए एक विशेष पहचान दी गई।
इस मौके पर शनिवार को सिलीसेढ़ झील पर एक कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम के बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पत्रकारों से कहा कि सिलीसेढ़ झील प्रकृति की अनमोल धरोहर है। इसको हाल ही में एक नई पहचान मिली है। सरिस्का आने वाले पर्यटक सिलीसेढ़ झील पर देसी विदेशी पक्षियों का आनंद ले। इसके प्रयास किया जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कटी घाटी पर नया जैव विविधता उद्यान बनेगा। इसके साथ ही विज्ञान उद्यान भी विकसित होगा। अलवर को दुनिया के नक्शे पर लाने के लिए टाइगर मैराथन आयोजित की जा रही है। जिसमें 18 हजार से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण करवाया है।
इससे पहले पक्षी उत्सव के दौरान बच्चों ने दूरबीन से उल्लू, पैंटॉप, डक, यूरोपीय पक्षी देखे। सर्दी के मौसम में 200 से ज्यादा प्रजातियां के पक्षी दुनिया भर से यहां आते हैं और यहां डेरा जमाते हैं। उनको देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं।
श्री यादव ने कहा कि अलवर में पहाड़, झरने, झील जंगल सब कुछ है। यह एनसीआर का हिस्सा है। ऐसे में यहां पर अपार संभावनाएं हैं। इसलिए अलवर को और बेहतर करने की आवश्यकता है। लगातार इस दिशा में काम किया जा रहा है।
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