नयी दिल्ली , दिसंबर 29 -- सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों को सब्सिडी देने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) ने दिल्ली सरकार पर वायु प्रदूषण से निपटने के नाम पर ईवी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है।
संगठन का कहना है कि सीएनजी भी एक हरित विकल्प है, लेकिन ईवी कंपनियों के दबाव में सरकार एक तरफ उन्हें सब्सिडी देने की योजना बना रही है, दूसरी तरफ वह सीएनजी वाहनों पर दंड लगाने की तैयारी में है।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण कम करने की योजना के तहत पेट्रोल और सीएनजी वाहनों पर एक-दो प्रतिशत उपकर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसका प्रारूप जारी कर उस पर आम लोगों और हितधारकों से राय मांगी गयी है। उसके बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर मंत्रिमंडल की मंजूरी दी जायेगी। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों को बैटरी क्षमता के हिसाब से प्रति किलोवाट पांच हजार रुपये की सब्सिडी देने का भी प्रस्ताव है।
आईएफटीआरटी ने एक प्रेस नोट में दिल्ली के प्रदूषण के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल कार्यालय को जिम्मेदार ठहराया है जो "चुनिंदा अधिकारियों की मदद से दिल्ली के प्रशासन की बागडोर संभाले हुए थे।"उन्होंने कहा कि ईवी को प्रत्साहन देने की आड़ में सीएनजी को हतोत्साहित किया जा रहा है जबकि उसके लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने पर कंपनियों ने काफी खर्च किया है।
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