बेंगलुरु , मार्च 25 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बुधवार को राज्य का बजट पेश करने के लिए "शुभ समय" चुनने की प्रथा को सख्ती से खारिज कर दिया।
श्री सिद्दारमैया ने कहा कि ऐसे फैसले अंधविश्वास से प्रभावित नहीं होने चाहिए। विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह राहु काल या गुलिक काल से जुड़ी मान्यताओं को नहीं मानते, जिन्हें हिंदू रीति-रिवाजों में पारंपरिक रूप से अशुभ समय माना जाता है। उन्होंने अपने तर्कवादी दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा, "मैं राहु काल या गुलिक काल में विश्वास नहीं करता। मैं उगादी और शिवरात्रि जैसे त्योहारों पर भी मांसाहारी भोजन करता हूँ और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।"उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासनिक फैसले धार्मिक या पारंपरिक विचारों के बजाय तर्क, संवैधानिक मूल्यों और वैज्ञानिक सोच से निर्देशित होने चाहिए। उनकी ये टिप्पणियाँ अंधविश्वास के खिलाफ उनकी लंबे समय से चली आ रही वैचारिक स्थिति और सार्वजनिक मामलों में तर्कसंगत सोच की वकालत के अनुरूप हैं। यह बयान कर्नाटक बजट पेश करने के समय को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आया, जहाँ कुछ सदस्यों ने शुभ मुहूर्त चुनने का मुद्दा उठाया था।
मुख्यमंत्री की स्पष्ट प्रतिक्रिया से यह साफ हो गया कि सरकार आधिकारिक कामकाज करते समय ऐसी मान्यताओं को ध्यान में नहीं रखेगी। उनकी टिप्पणियों ने एक नयी राजनीतिक और सार्वजनिक बहस छेड़ दी है; जहाँ उनके समर्थक तर्कवाद पर उनके जोर का समर्थन कर रहे हैं, वहीं आलोचकों का तर्क है कि सार्वजनिक जीवन में सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
इस मुद्दे ने एक बार फिर कर्नाटक की राजनीति में परंपरा के पालन और शासन के लिए अधिक धर्मनिरपेक्ष, विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने के बीच मौजूद व्यापक वैचारिक विभाजन को उजागर कर दिया है।
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