कानपुर , मई 7 -- उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर को स्वस्थ, सुरक्षित और रोगमुक्त शहर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन एवं जॉन स्नो इंडिया के सहयोग से गुरुवार को एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई। इसके तहत 'सिटी हेल्थ एक्शन प्लान' तैयार करने के उद्देश्य से एक भव्य 'को-क्रिएशन वर्कशॉप' का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर एक समावेशी और व्यवहारिक शहरी स्वास्थ्य मॉडल विकसित करना है। यह मॉडल जेएसआई के तकनीकी सहयोग से तैयार किया जा रहा है और इसे शहरी स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में एक अनूठे प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के नेतृत्व में नगर निगम, स्थानीय निकाय, बेसिक शिक्षा विभाग, आईसीडीएस (आंगनवाड़ी) तथा समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने सहभागिता की। विभिन्न विभागों के जमीनी स्तर के कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक ने मिलकर स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों और हस्तक्षेपों को सह-डिजाइन किया।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि 'सिटी हेल्थ प्लान' को धरातल पर उतारने में नगर निगम के छह जोनल अधिकारियों सहित सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत तय संकेतकों की नियमित निगरानी की जाएगी तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले वार्डों और जोनों को सम्मानित किया जाएगा। वहीं खराब प्रदर्शन वाले क्षेत्रों के खिलाफ जवाबदेही तय कर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक विभाग से नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे, जो निर्धारित समयसीमा के भीतर गतिविधियों के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेंगे।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने कार्यशाला के दौरान विभिन्न समूहों के साथ चर्चा करते हुए मापने योग्य संकेतकों तथा विभागीय समन्वय आधारित गतिविधियों को विकसित करने के लिए मार्गदर्शन दिया।
कार्यशाला की शुरुआत में जेएसआई की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. आयुषी और स्टेट टीम लीड डॉ. आशीष मौर्य ने योजना की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि 13 विभागों को चार प्रमुख स्वास्थ्य क्षेत्रों टीबी उन्मूलन, पूर्ण टीकाकरण, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण और गैर-संचारी रोग के लिए एकीकृत किया गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरि दत्त नेमी ने बहु-हितधारक सहभागिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान केवल समन्वित प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने 'एनीमिया मुक्त भारत' और 'वीएबी ट्रांसफॉर्मेशन' जैसी पूर्व सफल पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जलभराव वाले क्षेत्रों में बढ़ते डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों से निपटने के लिए सभी विभागों को मिलकर कार्य करना होगा।
कार्यशाला में चार प्रमुख फोकस क्षेत्रों टीबी उन्मूलन, पूर्ण टीकाकरण (एमआर कवरेज), वेक्टर एवं जलजनित रोग नियंत्रण तथा गैर-संचारी रोगों पर विशेष चर्चा की गई। इसके अलावा वास्तविक समय निगरानी के लिए रेड, येलो और ग्रीन फ्लैग आधारित डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करने की भी योजना बनाई गई है।
अधिकारियों ने बताया कि कानपुर की लगभग 39 लाख की शहरी आबादी, विशेषकर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले करीब पांच लाख लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना इस योजना की प्रमुख चुनौती होगी।
प्रशासन का मानना है कि इस कार्यशाला के माध्यम से तैयार किया जा रहा 'सिटी हेल्थ एक्शन प्लान' भविष्य में कानपुर को शहरी स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का एक मॉडल शहर बना सकता है।
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