नयी दिल्ली , जनवरी 28 -- सिगरेट पर 01 फरवरी से बढ़े कर, शुल्क एवं अधिभारों के कारण अगले वित्त वर्ष में इसकी बिक्री में छह से आठ प्रतिशत की गिरावट की आशंका है।

साख निर्धारक एवं बाजार अध्ययन एजेंसी क्रिसिल ने बुधवार को जार एक रिपोर्ट में यह बात कही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत सिगरेट पर 28 प्रतिशत कर है। साथ ही कई तरह से अधिभार भी लगाये जाते हैं। आगामी 01 फरवरी से क्षतिपूर्ति अधिभार समाप्त हो जायेगा और हर स्टिक पर 2.05 रुपये से 8.5 रुपये का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जायेगा। यह सिगरेट स्टिक की लंबाई के हिसाब से अलग-अलग होगा।

अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 65 सेमी से बड़े स्टिक के लिए 3.6 रुपये से 8.5 रुपये के बीच होगा। वहीं, 65 सेमी से छोटे सिगरेट पर 2.05 से 2.10 रुपये प्रति स्टिक का शुल्क लगेगा। इसके अलावा अंतिम मूल्य पर जीएसटी की दर भी बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी जायेगी।

क्रिसिल का कहना है कि 65 सेमी से छोटे सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क कम है, लेकिन कंपनियां इस श्रेणी में अधिक से अधिक बोझ खुद वहन करना चाहेंगी क्योंकि इसी श्रेणी के उपभोक्ता मूल्य के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं। इससे उनका परिचालन लाभ दो से तीन प्रतिशत तक कम हो सकता है, हालांकि फिर भी इसका स्तर अच्छा बना रहेगा।

एजेंसी ने तीन बड़ी सिगरेट कंपनियों के अध्ययन के आधार पर यह बात कही है जिनकी इस क्षेत्र में 95 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी है।

क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक शौनक चक्रवर्ती ने कहा कि मध्यम से प्रीमियम सिग्मेंट में शुल्क में ज्यादा वृद्धि होगी जो उनके अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 25 प्रतिशत तक होगी। लेकिन, इस श्रेणी में विनिर्माता ज्यादातर बोझ ग्राहकों पर पड़ने देंगे जो विशिष्ट उत्पादों का ही सेवन करते हैं।

दूसरी तरफ, मूल्य के प्रति संवेदनशील और आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली श्रेणी में कर का बोझ एमआरपी के लगभग 15 प्रतिशत तक होगा और विनिर्माता इसका कम से कम बोझ ग्राहकों पर डालेंगे। कुल मिलाकर अगले वित्त वर्ष 2026-27 में सिगरेट की बिक्री में छह से आठ प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2013-14 से 2017-18 के बीच विभिन्न प्रकार के शुल्कों में वृद्धि के कारण सिगरेट के एमआरपी 40-50 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इसके कारण बिक्री में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आयी है। विनिर्माताओं को इसकी भरपाई करने में तीन-चार साल का समय लगेगा।

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