दरभंगा , अप्रैल 11 -- सिंधी समाज ने सिंधी भाषा में भारतीय संविधान के नए संस्करण के प्रकाशन पर खुशी जताई और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के प्रति आभार व्यक्त किया है। पूज्य सिंधी पंचायत की ओर से आज सांई झूले लाल मंदिर में आयोजित सिंधी समाज की बैठक में समाज के प्रतिनिधियों ने इसे ऐतिहासिक एवं सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि इससे सिंधी भाषा के संरक्षण और संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।
पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष जगत लाल जुमनानी ने कहा कि संविधान का मातृभाषा में उपलब्ध होना लोकतंत्र को और मजबूत करता है तथा नई पीढ़ी को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों की बेहतर समझ प्रदान करता है। यह कदम देश की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति सी. पी राधाकृष्णन ने सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में संविधान का सिंधी भाषा में नवीनतम संस्करण जारी किया है।
इस अवसर पर सिंधी समाज की ओर से भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन को हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद प्रेषित किया गया।
समाज के प्रतिनिधियों ने अपने संदेश में कहा कि "हम सिंधी समाज की ओर से उपराष्ट्रपति का आभार व्यक्त करते हैं कि भारतीय संविधान को सिंधी भाषा में उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल की गई है। यह कार्य हमारी भाषा, संस्कृति और पहचान को सशक्त बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। हमें विश्वास है कि आपके मार्गदर्शन में देश की एकता और विविधता और अधिक सशक्त होती रहेगी।
अंत में समाज के लोगों ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रयास जारी रहेंगे, जिससे विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को समान सम्मान मिल सके। "बैठक में सिंधी समाज के राजकुमार मारीवाला, सिद्धू मल, सन्नी बाधवानी, मुकेश कुमार गंगानी, महेश अठवाणी, जय राम दास, परमानंद होईयानी, राजकुमारी मारीवाला, विजय जुमनानी, कीर्तन लखमणि उपस्थित थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित