हैदराबाद , मार्च 24 -- तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लु ने मंगलवार को सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड में कर्मचारियों के चिकित्सा संबंधी अयोग्यता के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी पर चिंता जताई और कहा कि इस तरह के अनावश्यक मामलों से सरकारी कंपनी पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

विधान परिषद में श्री मधुसूदनाचारी के सवाल का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 से 2023 के बीच 13,119 चिकित्सा संबंधी अयोग्यता के मामले दर्ज हुए, जबकि 2000 से 2014 के 14 वर्षों में यह संख्या केवल 3,859 थी। उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी की जांच एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और सतर्कता विभाग द्वारा की जा रही है।

संभावित दुरुपयोग को देखते हुए एक समिति गठित की गई है, जिसमें एक कार्मिक सलाहकार (पीए), खनन विभाग के महाप्रबंधक और एक नामित सदस्य शामिल हैं। यह समिति कोल इंडिया लिमिटेड और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के नियमों का अध्ययन कर रही है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा संबंधी अयोग्यता नीति के तहत प्रभावित कर्मचारियों के आश्रितों को रोजगार देने का प्रावधान है। पिछले दो वर्षों में 14 मेडिकल बोर्ड बैठकों के जरिए वर्ष 2024 में 1,041 और वर्ष 2025 में 949 आश्रितों को नौकरी दी गई।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि सिंगरेनी में कोयला उत्पादन लागत 4,088 रुपये प्रति टन है, जो कोल इंडिया लिमिटेड (1,065 रुपये) और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (2,169 रुपये) की तुलना में काफी अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि सिंगरेनी का लगभग 30 प्रतिशत कोयला तेलंगाना स्टेट पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जेनको) को दिया जाता है, जो खुले बाजार से महंगे दाम पर खरीद करता है, जिससे लागत बढ़ती है और इसका असर आम जनता पर पड़ता है।

उपमुख्यमंत्री के अनुसार, यदि जेनको कोल इंडिया लिमिटेड से कोयला खरीदे तो प्रति यूनिट लागत में करीब 2 रुपये और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से खरीदने पर 1.25 रुपये की कमी आ सकती है।

उन्होंने कहा कि सिंगरेनी और जेनको दोनों सरकारी संस्थाएं हैं, इसलिए इनके बीच संतुलन बनाना जरूरी है। साथ ही सिंगरेनी की उत्पादन लागत को अन्य कंपनियों के अनुरूप लाना इसके भविष्य और स्थिरता के लिए बेहद अहम है।

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