पुणे , मार्च 27 -- स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर दर्ज मानहानि के मामले में चल रही जिरह के दौरान महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आये हैं।
इस मामले की सुनवाई पुणे की एक विशेष अदालत में हो रही है, जहां लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता मिलिंद दत्तात्रेय पवार कर रहे हैं।
जिरह के दौरान, शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि अदालत के रिकॉर्ड से कथित तौर पर गायब महत्वपूर्ण सीडी के संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गयी थी। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि गायब सीडी की अब तक कोई विस्तृत जांच नहीं की गयी है, जिससे मामले में प्रस्तुत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं।
इसके अलावा गवाह ने प्रस्तुत किये गये भाषण के लिखित अंश (ट्रांसक्रिप्ट) में कई विसंगतियों को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि दस्तावेजों पर तारीखें नहीं हैं। उनमें से एक पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और दोनों भाषणों की सामग्री एक समान है। उन्होंने यह भी माना कि वह यह स्थापित नहीं कर सके कि ये ट्रांसक्रिप्ट मूल सीडी पर आधारित थे।
कार्यवाही के दौरान पुलिस जांच की खामियां भी सामने आयीं। शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का 'हैश वैल्यू' जनरेट नहीं किया गया था और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65(बी) के तहत अनिवार्य प्रमाणपत्र उचित रूप से प्राप्त नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त, यूट्यूब लिंक सहित डिजिटल साक्ष्यों का कोई वैज्ञानिक सत्यापन नहीं किया गया था।
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