नयी दिल्ली , जनवरी 21 -- विद्युत मंत्रालय ने विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से नई राष्ट्रीय ऊर्जा नीति (एनईपी) 2026 का मसौदा जारी करने की घोषणा की है जो नीति 2005 में अधिसूचित वर्तमान एनईपी का स्थान लेगी।

मंत्रालय की ओर से बुधवार को बताया गया है कि फरवरी 2005 में अधिसूचित पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति ने विद्युत क्षेत्र की मूलभूत चुनौतियों का समाधान किया जिनमें मांग-आपूर्ति में अंतर के साथ साथ बिजली की सीमित उपलब्धता और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा शामिल हैं। इसके बाद से विद्युत क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भागीदारी के साथ स्थापित उत्पादन क्षमता में चार गुना वृद्धि हुई है। विद्युत बाजारों और एक्सचेंजों ने पूरे देश में बिजली खरीद में अनुकूलता और दक्षता में सुधार किया है।

उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के बावजूद वितरण क्षेत्र में जैसे कि उच्च संचित घाटा और बकाया ऋण चुनौतियां निरंतर बनी हुई हैं। कई क्षेत्रों में शुल्क लागत के अनुरूप नहीं हैं और उच्च अंतर-सब्सिडी के परिणामस्वरूप औद्योगिक शुल्क बढ़ गए हैं, जो भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहे हैं।

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