रायपुर , अप्रैल 01 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धरसींवा में मंगलवार को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और विकास के संगम का प्रतीक ''कुँवरगढ़ महोत्सव'' का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर 136 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया। साथ ही ग्राम कूंरा का नाम बदलकर ''कुँवरगढ़'' करने की घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुँवरगढ़ महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश की लोक-आस्था, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे नई पहचान देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बस्तर, सरगुजा, कोरिया और सिरपुर महोत्सव की श्रृंखला में अब कुँवरगढ़ महोत्सव भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा।
इस दौरान नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण किया गया, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में सुविधा मिलेगी।
श्री साय ने क्षेत्र के विकास के लिए गौरवपथ निर्माण, रानीसागर तालाब के सौंदर्यीकरण, पुलिस चौकी स्थापना, खारून नदी में एनीकट निर्माण, खेल मैदान उन्नयन और टेकारी-नयापारा से बड़े नाला मार्ग के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण जैसे कार्यों की घोषणा की।
उल्लेखनीय है कि धरसींवा क्षेत्र का प्राचीन ग्राम कूंरा, जिसे अब ''कुँवरगढ़'' के रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है, ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। यह क्षेत्र आदिवासी शासक राजा कुँवर सिंह गोंड के साम्राज्य का प्रमुख केंद्र रहा है। उत्तर में माता कंकालिन, दक्षिण में माता चंडी, पश्चिम में माता महामाया और पूर्व में भगवान चतुर्भुजी की उपस्थिति इसे धार्मिक दृष्टि से भी विशेष बनाती है।
महोत्सव में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए हैं और स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनते हैं और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।
कार्यक्रम में विधायक अनुज शर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, मोना सेन, देवजीभाई पटेल, अंजय शुक्ला, संभागायुक्त महादेव कावरे, कलेक्टर गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
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