भोपाल , दिसंबर 28 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति के सोलह संस्कारों में पाणिग्रहण संस्कार का विशेष महत्व है, जो परिवार परंपरा की निरंतरता का आधार है। संतों के सानिध्य और सामूहिक विवाह के आनंद के साथ यह संस्कार संपन्न होना सौभाग्य का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर जिले के क्षिप्रा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा सह 251 जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह समारोह सामाजिक विभेद और फिजूल खर्ची जैसी बुराइयों के स्थान पर सामाजिक समरसता और मितव्यता का संदेश देते हैं। ऐसे आयोजनों को समाज के सभी वर्गों द्वारा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विवाह और मृत्यु भोज जैसे आयोजनों में अनावश्यक खर्च रोककर बचत और संसाधनों का उपयोग बच्चों की शिक्षा और परिवार की बेहतरी में किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं अपने डॉक्टर बेटे का विवाह भी सामूहिक विवाह समारोह में ही किया है, जो समाज के लिए एक उदाहरण है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प वर्षा कर नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने नवदंपतियों से माता-पिता की सेवा करने और समाज कल्याण में योगदान देने का आह्वान किया।

कथा वाचक उत्तम स्वामी जी ने कहा कि सामूहिक विवाह आयोजनों से फिजूलखर्ची रुकती है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। मुख्यमंत्री द्वारा अपने बेटे का विवाह सामूहिक आयोजन में करना पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है। समारोह में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक हेमंत खंडेलवाल, हितानंद शर्मा सहित बड़ी संख्या में नवविवाहित जोड़ों के परिजन उपस्थित रहे।

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