बारां , अप्रैल 08 -- अखिल भारतीय घुमंतू कार्य संयोजक दुर्गादास ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विगत 100 वर्षों से संस्कारित, अनुशासित एवं संगठित समाज के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

श्री दुर्गादास ने बताया कि संघ के स्वयंसेवक समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र,शिक्षा, सेवा, सुरक्षा, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं सांस्कृतिक जागरण, में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा देश प्राचीन काल में ज्ञान, विज्ञान, शौर्य, कला, कौशल और आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी राष्ट्र रहा है। वर्तमान समय में आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सकारात्मक चिंतन के आधार पर कार्य करें, जिससे भारत पुनः अपने वैभवशाली स्थान को प्राप्त कर सके।

श्री दुर्गादास ने विशेष रूप से समाज के प्रबुद्ध, प्रभावशाली एवं नेतृत्वकारी वर्ग की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि यह वर्ग समाज को दिशा देने में सक्षम है। यदि यह वर्ग राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाये, तो समाज में व्यापक एवं सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

संघ के 100 वर्ष के पूरे होने पर आयोजित गोष्ठी के दौरान उपस्थित विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख जनों ने भी अपने विचार व्यक्त किये। वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण, हिंदुत्व के मूल्यों के प्रचार-प्रसार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, युवाओं के मार्गदर्शन तथा राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जैसे विषयों पर अपने सुझाव रखे।

सभी ने एक स्वर में समाज को संगठित, संस्कारित एवं आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान सौहार्दपूर्ण वातावरण में संवाद एवं विचार-विमर्श हुआ, जिससे अनेक उपयोगी सुझाबारां नगर द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सार्वजनिक धर्मदा संस्था सभागार में एक गरिमामय प्रमुख जन गोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम में नगर के विभिन्न क्षेत्रों, शिक्षा, व्यवसाय, समाज सेवा, प्रशासन एवं संस्कृति से जुड़े लगभग 150 प्रबुद्ध एवं प्रमुख नागरिकों की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।

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