बैतूल , अप्रैल 12 -- प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु सुधांशु महाराज ने आज रविवार को बैतूल आयोजित प्रेसवार्ता में सामाजिक समरसता, संस्कारों के ह्रास, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और शिक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चिंता व्यक्त करते हुए सकारात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन सुधार की संभावनाएं अभी भी मौजूद हैं। संकट के समय अपेक्षित सामाजिक सहयोग की कमी को उन्होंने चिंता का विषय बताया और कहा कि समाज के दृष्टिकोण में बदलाव आवश्यक है।

समरसता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक अर्थ सभी के प्रति समान दृष्टि रखना है। 'धर्म', 'रिलीजन', 'मत', 'पंथ' और 'संप्रदाय' को अलग-अलग अवधारणाएं बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी एक वर्ग को प्राथमिकता देना धर्म नहीं, बल्कि सभी के साथ समान व्यवहार ही सच्चा धर्म है।

सोशल मीडिया के प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इसका दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिसका नकारात्मक असर विशेषकर बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों के लिए डिजिटल नियंत्रण व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे उनके मानसिक और नैतिक विकास की सुरक्षा हो सके।

भाषा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अंग्रेजी को ही प्रगति का एकमात्र माध्यम मानना उचित नहीं है। भारत में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय भाषाओं को सम्मान देना आवश्यक है। राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभा में गिरती भाषा-शैली समाज के चयन का परिणाम है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे जाति और भाषा के बजाय आदर्श व्यक्तित्व वाले प्रतिनिधियों का चुनाव करें।

संस्कारों के ह्रास पर चिंता जताते हुए उन्होंने बताया कि ब्रिटिश काल में बड़ी संख्या में गुरुकुल बंद हो गए थे। उन्होंने संत समाज से आश्रमों में गुरुकुल स्थापित करने का आह्वान करते हुए आगामी कुंभ तक दस गुरुकुल खोलने का संकल्प व्यक्त किया, जिनमें से तीन प्रारंभ हो चुके हैं। इसके साथ ही प्रत्येक मंदिर के साथ संस्कार केंद्र स्थापित करने पर भी बल दिया।

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