भोपाल , दिसम्बर 29 -- मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण एवं उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन-2047 और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। सामाजिक न्याय से लेकर कृषि-उद्यानिकी तक, समावेशी विकास की मजबूत नींव है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार श्री कुशवाह को प्रदेश में गत 2 वर्षों में उद्यानिकी और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में हुए उपलब्धियों, नवाचारों और आगामी 3 वर्षों में विभाग की कार्य योजनाओं के संबंध में अवगत कराया। उन्हें बताया गया कि गत दो वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 25.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.29 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में उत्पादन 389.10 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 425.68 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है। प्रदेश की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 15.08 मीट्रिक टन, राष्ट्रीय औसत से अधिक है। मध्यप्रदेश मसाला उत्पादन में प्रथम, पुष्प उत्पादन में द्वितीय, सब्जी उत्पादन में तृतीय और फल उत्पादन में चतुर्थ स्थान पर है।
उन्हें बताया गया कि रीवा का सुंदरजा आम और रतलाम का रियावन लहसुन जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं। प्रदेश की 15 फसलों का जीआई पंजीयन कराया गया है। इजराइल के तकनीकी सहयोग से मुरैना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है, जबकि छिंदवाड़ा और हरदा में नए सीओई विकसित किए जा रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण और नवाचार के तहत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना में 8,198 ऋण प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं और 3,113 उद्यमियों को 108.64 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। सेंसर आधारित स्वचलित फर्टिगेशन, मखाना क्षेत्र विस्तार, एग्जोटिक सब्जी क्लस्टर, हाईटेक नर्सरी और इंक्यूबेशन सेंटर जैसे नवाचार लागू किए जा रहे हैं।
आगामी तीन वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 33.39 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने, 15 हजार सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और 25 फसलों को जीआई टैग दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत उद्यानिकी को बढ़ावा, खाद्य प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी।
इस अवसर पर कुशवाहा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने गत दो वर्षों में सामाजिक और शारीरिक रूप से कमजोर वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई अभिनव और प्रभावी पहल की हैं। दिव्यांगजनों की क्षमताओं को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 6 लाख 97 हजार दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 41.87 करोड़ रुपये की पेंशन वितरित की जा रही है। साथ ही 9 लाख 89 हजार से अधिक दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे उन्हें विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण और कृषि-उद्यानिकी के क्षेत्र में किए गए ये प्रयास प्रदेश को समावेशी, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रदेश के 17 जिलों में शासकीय एवं अशासकीय विशेष विद्यालयों के तीन-तीन कक्षों को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किया गया है। श्रवण बाधित दिव्यांग जनों की संवाद संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए क्यूआर कोड आधारित लाइव इंटरप्रेटर सुविधा प्रारंभ की गई है। अब तक 34,649 दिव्यांगजनों को 59 हजार से अधिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। रोजगार सृजन के क्रम में 2,589 दिव्यांगजनों को शासकीय सेवाओं में नियुक्ति दी गई है। केन्द्र सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था एटिपिकल एडवांटेज के साथ 2 दिसंबर 2025 को एमओयू किया गया है। इसके माध्यम से दिव्यांगजनों को उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक संस्था द्वारा 5 दिव्यांगजनों को रोजगार दिया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 958 दंपत्तियों को लाभ दिया गया है। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। तैराकी प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सत्येन्द्र लोहिया, रामबरन पाल एवं सद्दाम खान को पाँच-पाँच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 81 वृद्ध आश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें राज्य, केंद्र और जनसहयोग से संचालन हो रहा है। प्रति हितग्राही 2,200 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण सहायता सहित अन्य आवश्यक व्यय का वहन किया जा रहा है। राजधानी भोपाल में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पेड ओल्ड एज होम का संचालन सेवा भारती मध्य भारत प्रांत द्वारा किया जा रहा है।
श्री कुशवाह ने बताया कि प्रदेश की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 54 लाख से अधिक हितग्राहियों का 100 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण किया गया है। प्रतिमाह 325 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे खातों में अंतरित की जा रही है। "विकसित भारत का मंत्र, भारत हो नशे से स्वतंत्र" अभियान के तहत प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह सहायता योजना के तहत विगत 2 वर्षों में 1 लाख 52 हजार हितग्राहियों को 838.44 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। पात्रता और आयोजन प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी बनाने के लिए योजना में संशोधन किया गया है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार लाभान्वित हो सकें।
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