भरतपुर , फरवरी 27 -- राजस्थान में डीग में भगवान श्री कृष्ण की क्रीड़ा स्थली कहे जाने वाले आदि बद्री धाम के दिव्य पर्वतों की रक्षा के लिए किये गये आंदोलनों और आत्माहुति देने वाले सन्तों की स्मृति में साधु सन्तों एवं महात्माओं की पांचवीं परिक्रमा यात्रा आदि बद्री के नील घाटी, गदर वास, रुंध, हयातपुर होते हुए शुक्रवार को जटेरी पहुंची।

मान मंदिर एवं ब्रज के संत पद्मश्री रमेश बाबा के सानिध्य में आयोजित यह यात्रा खनन माफिया द्वारा डाइनामाइट से उड़ाये जा रहे दिव्य पर्वतों की रक्षा के संकल्प के साथ एक आंदोलन के रूप में प्रति वर्ष आयोजित की जाती है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में इन पर्वतों को आरक्षित वन घोषित किये जाने के बाद भी उन्हें छलनी होता देख संत विजय बाबा ने आत्मदाह करके अपनी आहुति दी थी। उनकी स्मृति और पर्वतों के महात्म्य को ध्यान में रखते यह परिक्रमा आयोजित की जाने लगी है। इस अवसर पर मान मंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह और महंत शिवराम दास ने राज्य के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम से मुलाकात करके आदि बद्री पर्वत की परिक्रमा मार्ग का निर्माण कराने की अपेक्षा की ताकि ब्रजवासियों को परिक्रमा करने में कोई कष्ट न हो।शनिवार को जटेरी से चलकर डावक पहुंचने बाली इस परिक्रमा यात्रा में ब्रज क्षेत्र की महिलाएं भी गोपियों के रूप में नाचते-गाते हुए धूमधाम से परिक्रमा में शिरकत कर रहीं हैं।

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