श्रीनगर , दिसंबर 29 -- नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता एवं विधायक तनवीर सादिक ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के उस बयान का बचाव किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे कुछ नेताओं पर टिप्पणी की थी।

श्री सादिक ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ये टिप्पणियां साफ तौर पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती और उनकी पुत्री इल्तिजा मुफ्ती पर थीं।

गौरतलब है कि पुलिस ने मौजूदा आरक्षण नीति के खिलाफ प्रदेश में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को रविवार को नाकाम कर दिया। पुलिस ने श्रीनगर के सांसद एवं नेकां के नेता आगा रुहुल्लाह मेहदी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता इल्तिजा मुफ्ती सहित कई नेताओं को घर में नजरबंद कर दिया और उस पार्क को सील कर दिया जहां धरना प्रदर्शन होना था। इन गिरफ्तारियों का बचाव करते हुए श्री अब्दुल्ला ने विरोध प्रदर्शन के पीछे के नेताओं पर अशांति फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने रविवार को कहा, "आपको उन नेताओं से पूछना चाहिए कि वे क्या करना चाहते थे। हम जितना हो सकता है उतना कर रहे हैं। शायद, उन्हें यह पसंद नहीं है कि राज्य प्रगति कर रहा है। वे अशांति चाहते हैं, जिसे हम होने नहीं देंगे।"श्री अब्दुल्ला की इस टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर श्री सादिक ने कहा कि यह बयान पीडीपी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए दिया गया था।उन्होंने कहा, "वह जिसके बारे में भी बात कर रहे हैं, आप खुद सोचिए। पुत्री कह रही है कि उसे हिरासत में लिया गया है और मां इधर-उधर जा रही है। यह उनके बारे में था।"उल्लेखनीय है कि रविवार को इल्तिजा मुफ्ती ने कहा था कि विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन से पहले उन्हें घर में नज़रबंद कर दिया गया था। चूंकि वह अपनी मां महबूबा मुफ्ती के साथ रहती हैं, इसलिए इस कदम से यह अटकलें लगाई गईं कि पूर्व मुख्यमंत्री को भी हिरासत में लिया गया है। हालांकि सुश्री महबूबा को एक पार्टी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अनंतनाग जाने की इजाज़त दी गई थी।

श्री सादिक ने विरोध प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों पर सवाल उठाया और कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनी हुई सरकार के नियंत्रण में नहीं है। उन्होंने कहा, "कल भी मैंने कहा था कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त दी जानी चाहिए। उन्हें रोकना गलत है।" पाबंदियों को चुनिंदा तरीके से लागू करने पर सवाल उठाते हुए नेकां के मुख्य प्रवक्ता ने कहा, "जब वे मुख्यमंत्री के द्वार तक आ सकते हैं (पिछले साल छात्रों के विरोध प्रदर्शन का ज़िक्र करते हुए), तो वे दूसरी जगहों पर क्यों नहीं जा सकते? अगर तब यह ठीक था, तो आज यह गलत कैसे हो सकता है? मुझे लगता है कि यह गलत था।" उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने से रोकना गलत और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

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