नयी दिल्ली , फरवरी 27 -- दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े फर्जी बैंक खाते चलाने के आरोप में एक 22 वर्षीय युवती को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर कई साइबर धोखाधड़ी शिकायतें दर्ज की गयी थीं, जिसके बाद पांच फरवरी को एक मामला दर्ज किया गया था। फिर छह फरवरी को ग्रेटर नोएडा वेस्ट की रहने वाली आरोपी रश्मि को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया गया था।
अधिकारी ने बताया कि धोखाधड़ी में बेंगलुरु के एक निवासी ने 50,000 रुपये और तेलंगाना के एक अन्य व्यक्ति ने 3.8 लाख रुपये गंवाए थे। प्रारंभिक जांच के दौरान, टीम ने पाया कि चोरी की गई राशि कथित तौर पर विजय विहार के असलम के दो बैंक खातों में जमा की गई थी। जांच में पता चला कि ये खाते व्यक्तियों को धोखा देने और अवैध रूप से धन भेजने में लगे एक समन्वित साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े थे।
पुलिस ने संदिग्ध बैंक खातों के विवरण एकत्र किये, बैंकिंग ऐप के लॉगिन और लॉगआउट आईपी लॉग की जांच की और 50 से अधिक मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईपीडीआर) का विश्लेषण करने के बाद तकनीकी निगरानी शुरू कर दी।
अधिकारी ने बताया कि तकनीकी निगरानी और स्थानीय खुफिया जानकारी का उपयोग करते हुए पुलिस ने आरोपी का ग्रेटर नोएडा तक पीछा किया। एक आवासीय परिसर में छापेमारी के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ के दौरान रश्मि ने स्वीकार किया कि वह कमीशन लेकर साइबर अपराधियों को फर्जी खाते उपलब्ध कराती थी। अधिकारी ने कहा, "इन खातों ने नकली क्रिप्टोकरेंसी निवेश, धोखाधड़ी वाले ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और उच्च-रिटर्न वाले निवेश घोटालों की सुविधा प्रदान की।" धोखाधड़ी के माध्यम से प्राप्त धन को कथित तौर पर जांच से बचने के लिए कई खातों के माध्यम से भेजा गया था।
अपने बयान में आरोपी ने खुलासा किया कि बैंक खाता किट एक सह-आरोपी छाया द्वारा प्रदान किए गए थे, जिसे पहले मामले के संबंध में गिरफ्तार किया गया था। उसने विवान का नाम भी लिया, जिसे इस ऑपरेशन का सरगना माना जा रहा है। पुलिस उसे हिरासत में लेने की सक्रिय कोशिश कर रही है।
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