सहारनपुर , अप्रैल 27 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के चलते सहारनपुर में आवंटित 16 नए खनन पट्टाधारक एक वर्ष बाद भी खनन कार्य शुरू नहीं कर सके हैं, जबकि पूर्व में आवंटित एक पट्टाधारक प्रदीप राणा क्षेत्र में लगातार खनन कार्य कर रहा है, जिससे पूरे खनन क्षेत्र में उसके एकाधिकार की स्थिति बन गई है। सूत्रों के अनुसार, सहारनपुर में 22 माह तक जिलाधिकारी रहे और वर्तमान में आगरा के जिलाधिकारी मनीष बंसल ने अपने कार्यकाल के दौरान अवैध खनन पर कड़े प्रहार किए थे। उन्होंने अवैध खनन और परिवहन करने वालों पर कई करोड़ रुपये के जुर्माने लगाए। तबादले से कुछ दिन पूर्व उन्होंने प्रदीप राणा की खनन संबंधी अनियमितताओं को देखते हुए उस पर पांच करोड़ रुपये तथा एक अन्य स्टोन क्रशर मालिक वीरेंद्र सिंह पर भी पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिससे अवैध खनन से जुड़े लोगों में खलबली मच गई।

इसी बीच कुछ लोगों ने नए आवंटित खनन पट्टों को लेकर एनजीटी में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद एनजीटी ने नए पट्टाधारकों को पर्यावरण विभाग एवं संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने के निर्देश दिए। एक पट्टाधारक सुमित कुमार ने बताया कि प्रत्येक पट्टाधारक ने शासन के पास 10-10 करोड़ रुपये की प्रतिभूति राशि जमा की है। इस प्रकार कुल 160 करोड़ रुपये सरकारी कोष में जमा हैं, लेकिन खनन कार्य शुरू न होने से सभी पट्टाधारक गंभीर आर्थिक संकट और परेशानी में हैं। उन्होंने बताया कि कुछ पट्टाधारकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी समस्या रखी और राज्य सरकार से एनजीटी में प्रभावी पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सहायता लेने की मांग की।

सहारनपुर के बेहट क्षेत्र में यमुना नदी किनारे स्थित गांव बरथा, कोरसी, असलमपुर बरथा, नुनियारी, हैदरपुर हिंदूवाला और ढिक्काकलां में पट्टों के पुनर्गठन और पुनः पूर्ति अध्ययन का कार्य बीजीपीएस मशीन और ड्रोन के माध्यम से किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने इस समस्या के समाधान के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त) सलील कुमार पटेल की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति खनन पट्टा क्षेत्रों के पुनर्गठन और पुनः पूर्ति का विस्तृत अध्ययन करेगी।

समिति में जिला वन अधिकारी विपुल सिंघल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. योगेंद्र कुमार, जिला खान अधिकारी सुभाष सिंह, खान निरीक्षक अभिलाश चौबे, एसडीएम नकुड़, एसडीएम सदर, एसडीएम बेहट सहित सिंचाई, सामाजिक वानिकी और भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अधिकारी शामिल हैं।

जिला खान अधिकारी सुभाष सिंह ने बताया कि वह इसी मामले में एनजीटी में पक्ष रख रहे हैं। वहीं खनन व्यवसाय से जुड़े लोगों का आरोप है कि जिला खनन विभाग की कार्यप्रणाली के कारण जनपद में लंबे समय से अव्यवस्था बनी हुई है। वैध खनन शुरू न होने से क्षेत्र में निर्माण सामग्री की भारी कमी हो रही है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। दूसरी ओर, अवैध खनन से लदे वाहन दिन-रात सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। थाना चिलकाना, बेहट और मिर्जापुर पुलिस द्वारा आए दिन खनन से लदे कई वाहनों को सीज किया जा रहा है।

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