अलवर , जनवरी 31 -- राजस्थान में सरिस्का के जंगलों में जहां बाघ पर्यटन लिए महत्वपूर्ण है, वहीं अब सरिस्का प्रशासन पक्षी केंद्रित पर्यटन बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
यह संभावना सिलीसेढ़ झील के अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर आर्द्रभूमि में शामिल होने के बाद ज्यादा बढ़ गयी है। अब सरिस्का प्रशासन भी चाहता है कि सिलीसेढ़ के अलावा सरिस्का क्षेत्र स्थित कई झीलों को रामसर आर्द्रभूमि में शामिल किया जाये, जिससे पक्षियों के अनुकूल जलवायु मिले और उनका संरक्षण किया जा सके। कोशिश यह की जायेगी कि जिस तरीके से भरतपुर का केवला उद्यान (घना पक्षी विहार) पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है, इसी तरह सरिस्का को भी विकसित किया जाये। सरिस्का में कई झील ऐसी हैं, जहां लगातार पानी रहता है और यहां की जलवायु पक्षियों के अनुकूल है।
सरिस्का के उप वन संरक्षक अभिमन्यु साधारण ने शनिवार को बताया कि सरिस्का में कई देशों के पक्षी प्रवास पर करने आते हैं, क्योंकि सरिस्का में करना का बास, मंगलसर, मानसरोवर बांध और सिलीसेढ़ जैसी कई आर्द्रभूमि हैं, जहां पक्षी आते हैं। एक बड़ा जलस्रोत कांकबाड़ी फोर्ट है, जहां कई विदेशी पक्षियों का प्रवास देखा गया है। सरिस्का में पश्चिमी यूरोप, मध्य एशिया और साइबेरिया से पक्षी आते हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा सिलीसेढ़ को रामसर आर्द्रभूमि घोषित किया गया है। हमारा प्रयास रहेगा कि आने वाले समय में सरिस्का के कई जलस्रोतों को रामसर आर्द्रभूमि में शामिल किया जाये, जिससे यहां पक्षियों के लिये संरक्षित क्षेत्र बनेगा और विदेशी पक्षी आएंगे और उन्हें अच्छा संरक्षित प्राकृतिक आवास भी मिलेगा।
मुख्य बात यह है कि यह प्रजनन क्षेत्र भी बन सकता है, क्योंकि प्रवासी पक्षी जब आते हैं, तो यह प्रजनन भी करते हैं। पक्षियों के लिए यहां अनुकूल प्राकृतिक आवास मिले तो निश्चित रूप से जिस तरीके से बाघ केंद्रित पर्यटन है, उसी तरह यहां विश्व पक्षी केंद्रित पर्यटन विकसित हो जायेगा, जो भविष्य में सरिस्का के विकास के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित