अलवर , फरवरी 02 -- राजस्थान में अलवर के सरिस्का बाघ अभयारण्य में सोमवार को क्षेत्राधिकार को लेकर हुए संघर्ष में छह वर्षीय बाघिन की मौतहो गयी।

सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि बाघ परियोजना सरिस्का के अकबरपुर रेंज नाका पृथ्वीपुरा बीट डाबली के वन क्षेत्र में बाघिन एसटी- 28 की क्षेत्राधिकार को लेकर हुए संघर्ष में मौत हो गयी। घटना की सूचना मिलते ही वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, उप वन संरक्षक, पशु चिकित्सक दल और समस्त फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचे। बाघिन का पोस्टमार्टम तीन चिकित्सकों के दल ने किया, जिसमें उसके समस्त अंग पाये गये। कोई भी संदिग्ध साक्ष्य नहीं मिले। बाघिन एसटी- 28 काे राजस्व ,पुलिस एवं स्थानीय लोगों की मौजूदगी में आज राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा निर्देशानुसार दफना दिया गया।

श्री सिंह ने बताया कि उसकी उम्र करीब छह वर्ष थी और डाबली के क्षेत्र में पहाड़ की चोटी पर उसका शव मिला है। उसके शरीर पर करीब नौ घाव हैं। उन्होंने आशंका जतायी कि उसका संघर्ष उसकी मां एसटी-14 या बाघिन एसटी-17 से हुआ होगा। उन्होंने बताया कि कलाकड़ी चौकी पर पोस्टमार्टम कराया गया और वहीं अंतिम संस्कार किया गया।

दूसरी ओर वन्य जीव विशेषज्ञों के अनुसार कभी भी नर और मादा बाघ का संघर्ष नहीं होता। बाघों में या तो मादा से मादा या नर से नर भिड़ेगा। नर और मादा तो अपने रास्ते से दूसरे की ओर चले जाते हैं या फिर संतान उत्पत्ति के लिए इस क्षेत्र में कुछ दिन रहते हैं।

सरिस्का में अब 49 बाघ-बाघिन और शावक रह गये हैं।

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