भरतपुर , मार्च 30 -- देश में सरसों के तेल के उत्पादन में अपना प्रमुख स्थान रखने पूर्वी राजस्थान के भरतपुर एवं डीग जिले में सोमवार को सरसों की कीमतों में प्रति क्विंटल 800 और सरसों तेल की कीमतों में भी 30 प्रति लीटर तक की उछाल के बाद सरसों उत्पादक किसानों एवं तेल मिल व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ गयी।

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के सीधे असर के रूप में सरसों एवं उसके तेल में एक ही दिन में आये इस उछाल को लेकर कृषि उपज मंडी के सूत्रों ने बताया कि फरवरी में जो सरसों 6250 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी, उसके दाम अब 7000 के करीब पहुंच गये हैं। स्थानीय बाजारों में सरसों तेल की कीमतों में भी 30 प्रति लीटर तक का इजाफा देखा गया है।

सूत्रों ने बताया कि भारत अपनी खाद्य तेल की 50 प्रतिशत जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों पर निर्भर है। युद्ध के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे घरेलू बाजार में मांग और बढ़ गयी है। इस तेजी को देखते हुए किसानों ने भी अपनी उपज का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। बेहतर मुनाफे की उम्मीद में किसान फिलहाल मंडी में सरसों लाने से बच रहे हैं और कीमतों में और अधिक उछाल का इंतजार कर रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति लंबी खिंचती है, तो आने वाले दिनों में खाद्य तेल और भी महंगा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार देश मे प्रमुख खाद्य तेल के रूप में सरसों के तेल की कीमत में उछाल से लोगों की रसोई के बजट पर असर नजर आ सकता है।

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