अंबिकापुर , फरवरी 12 -- छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में बॉक्साइट खनन से प्रभावित भूमि के एवज में वितरित किए जाने वाले 19 करोड़ रुपये के मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। प्रशासनिक जांच में तहसीलदार और पटवारी को दोषी पाए जाने के बाद दोनों को जिला कार्यालय अटैच कर दिया गया है।

कलेक्टर अजीत वसंत ने गुरुवार को बताया कि मैनपाट के उरंगा और बरिमा गांव में बॉक्साइट खनन प्रभावित 220 और 24 परिवारों को मुआवजा दिया जाना था। शिकायत मिली थी कि मुआवजा वितरण सूची में 23 से अधिक ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनके पास भूमि ही नहीं है। इन अपात्र व्यक्तियों को मुआवजा देने की तैयारी की जा रही थी।

इससे भी गंभीर मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के पुत्र से जुड़ा है। आरोप है कि उनके फार्म हाउस को कृषि भूमि बताकर उसके एवज में भी मुआवजा राशि स्वीकृत कर ली गई थी। यह भूमि खनन प्रभावित क्षेत्र में आती है, लेकिन उसके फार्म हाउस होने के बावजूद उसे खेत दिखाकर मुआवजा दिए जाने की कार्रवाई की गई।

शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। समिति की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में मैनपाट तहसीलदार और संबंधित पटवारी को अनियमितता का दोषी पाया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बिना भूमि वाले व्यक्तियों के नाम मुआवजा सूची में दर्ज करने और पात्र लाभार्थियों को दरकिनार करने की साजिश रची गई थी।

कलेक्टर ने बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर तत्काल प्रभाव से तहसीलदार और पटवारी को जिला कार्यालय अटैच कर दिया गया है। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच के लिए राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया गया है और नियत समय सीमा के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

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