नयी दिल्ली , मार्च 25 -- सरकार ने आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण एवं पहचान (आईवीएफआरटी) योजना को 1800 करोड़ रुपये की लागत से अगले पांच वर्ष 2031 तक जारी रखने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी।
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह मंजूरी आगामी एक अप्रैल से 31 मार्च 2031 तक के लिए दी गयी है और इसके लिए 1800 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।
आईवीएफआरटी प्लेटफॉर्म देश में आव्रजन, वीजा जारी करने और विदेशियों के पंजीकरण से संबंधित कार्यों को आपस में जोड़ने का काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षित और एकीकृत सेवा वितरण ढांचे के भीतर आव्रजन और वीजा सेवाओं का आधुनिकीकरण और उन्नयन करना है। इसका लक्ष्य वैध यात्रियों को सुविधा प्रदान करना और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
इस परियोजना को वर्ष 2010 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 1011 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के साथ सितंबर 2014 तक की अवधि के लिए मंजूरी दी थी। वर्ष 2015 में परियोजना का बजट संशोधित कर 638.90 करोड़ रुपये किया गया और कार्यान्वयन अवधि को 31 मार्च 2017 तक बढ़ाया गया, तथा बाद में बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव के इसे 31 मार्च 2021 तक बढ़ाया गया। संशोधित कुल प्रावधान 638.90 करोड़ रुपये की तुलना में 613.28 करोड़ रुपये का व्यय किया गया। वर्ष 2021 से तक पाँच वर्षों की अवधि के लिए परियोजना के विस्तार को मंत्रिमंडल द्वारा 1365 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के साथ स्वीकृति दी गई।
यह योजना मौजूदा योजना के दायरे और क्षमता का विस्तार और सुदृढ़ीकरण करेगी जिसमें न केवल मौजूदा संरचना का पुनर्गठन शामिल है, बल्कि उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी समाधान भी शामिल किए गए हैं। वैश्विक यात्रा की बदलती मांगों को पूरा करने और उभरती राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए इस परियोजना का आधुनिकीकरण आवश्यक है। हाल ही में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के लागू होने तथा उसके नियमों और आदेशों के बाद, आव्रजन नियंत्रण और विदेशी प्रबंधन (जिसमें अवैध प्रवासन शामिल है) के क्षेत्र में उभरती आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए इस प्रणाली को सुदृढ़ और आधुनिक बनाना अनिवार्य हो गया है।
इस परियोजना की निरंतरता केवल एक तकनीकी उन्नयन नहीं है, बल्कि विश्वस्तरीय आव्रजन और वीजा प्रणाली के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को बढ़ावा देने की भारत सरकार की दृष्टि के अनुरूप एक रणनीतिक परिवर्तन है। अगले चरण में तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जिसमें उभरती तकनीकी नवाचार, मूलभूत अवसंरचना का रूपांतरण और तकनीक एवं सेवा का अनुकूलन शामिल है।
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