नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सांसद पी संदोष कुमार ने केंद्र सरकार द्वारा विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों पर पीछे हटने को "दबाव में लिया गया अस्थायी फैसला" बताया है।
उन्होंने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि यह सरकार के रुख में बदलाव नहीं, बल्कि वाम दलों, केरल के सांसदों और जनता के लोकतांत्रिक विरोध का परिणाम है। श्री कुमार ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन अलोकतांत्रिक थे, जिनका उद्देश्य केंद्र सरकार को संस्थाओं, संपत्तियों और गतिविधियों पर व्यापक नियंत्रण देना था। उन्होंने कहा कि इससे खासकर अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित संगठनों की स्वायत्तता प्रभावित होती है।
उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि संसद में व्यापक आंकड़े पेश किए बिना ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
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