पटना , दिसंबर 29 -- बिहार के उपमुख्यमंत्री तथा राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
श्री सिन्हा ने आज कहा कि राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र, कांटी की भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज किया जाना अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में यह पाया गया कि नियमों की अनदेखी कर या न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए सरकारी भूमि को निजी नाम पर दर्ज किया गया है, तो जिम्मेदार पदाधिकारियों और लाभार्थियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई होगी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की भूमि किसी भी सूरत में हड़पी नहीं जा सकती और ऐसे मामलों में सरकार की नीति शून्य सहनशीलता की है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर के कांटी में 44 डिसमिल सरकारी कृषि भूमि के मामले में बड़ी प्रशासनिक चूक है और भविष्य में ऐसे मामलों को सरकार सख्ती से रोकेगी तथा सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर जिले के काँटी अंचल अंतर्गत राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र, काँटी की 44 डिसमिल सरकारी जमीन को निजी व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज किए जाने के मामले में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। स्वत्व वाद संख्या 303/2018 (नवीन कुमार बनाम राज्य सरकार) में दिसंबर 2023 में पारित आदेश के आलोक में अंचलाधिकारी, काँटी ने राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र के नाम से दर्ज कुल 6 एकड़ जमीन में से 44 डिसमिल भूमि का दाखिल-खारिज निजी व्यक्ति के पक्ष में कर दिया था।
नियमों के अनुसार इस प्रकरण में सर्वप्रथम विधिक मंतव्य प्राप्त कर सक्षम न्यायालय में अपील दायर किया जाना आवश्यक था, लेकिन अंचलाधिकारी, काँटी ने ऐसा नहीं किया और सीधे सरकारी कृषि भूमि का दाखिल-खारिज कर दिया। इस मामले को गंभीर मानते हुए अपर समाहर्ता, मुजफ्फरपुर से जांच कराई गई।
अपर समाहर्ता, मुजफ्फरपुर की तरफ से प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से यह प्रतिवेदित किया गया कि अंचलाधिकारी, काँटी ने विभागीय प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए कृषि विभाग की भूमि का दाखिल-खारिज निजी व्यक्ति के पक्ष में किया है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिलाधिकारी, मुजफ्फरपुर ने अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना को वस्तुस्थिति से अवगत कराया तथा तत्कालीन अंचलाधिकारी, काँटी के विरुद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया गया। इस जाँच के बाद विभाग ने तत्कालीन अंचलाधिकारी, काँटी को निलंबित कर दिया है।
प्रशासनिक हलकों में इस पूरे मामले को सरकारी कृषि भूमि के संरक्षण से जुड़ा गंभीर प्रकरण माना जा रहा है, जिस पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित