मोतिहारी , मार्च 11 -- महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति संजय श्रीवास्तव ने बुधवार को कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा आज सम्पूर्ण विश्व में सर्वाधिक प्रासंगिक है।

प्रो. श्रीवास्तव ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित "भारतीय ज्ञान परम्परा एवं समकालीन परिप्रेक्ष्य" विषयक सप्तदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा को समझने के लिए उसके मूल संदर्भों तथा भारतीय चिंतन परम्परा को जानना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा मानव जीवन के विभिन्न आयामों को समाहित करती है और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इसकी उपयोगिता और भी बढ़ गई है।

विश्वविद्यालय की भारतीय ज्ञान परम्परा समिति द्वारा आयोजित इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रसून दत्त सिंह, प्रो. ब्रजेश पाण्डेय, प्रो. विमलेश कुमार सिंह, प्रो. श्याम कुमार झा, संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बबलू पाल तथा डॉ. विश्वजीत वर्मन सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए अतिथिगण उपस्थित थे।

अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा वेदकालीन परम्परा से विकसित हुई है और भारतीय संस्कृति ही इसका मूल आधार है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा का विकास विभिन्न भाषाओं में हुआ है और इसकी जड़ें अत्यंत गहरी हैं।

प्रो. ए. के. शरण ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा के विकास के लिए संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में प्रशासन, अर्थव्यवस्था तथा वित्त जैसे विषय भी महत्वपूर्ण अंग हैं।

प्रो. वंदना झा ने भारतीय ज्ञान परम्परा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए महाकवि विद्यापति की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा मनुष्य को अपने अस्तित्व को समझने की दिशा प्रदान करती है।

इस अवसर पर जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति परमेन्द्र कुमार बाजपेई ने तत्त्वमीमांसा के प्रमुख बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि सांख्य दर्शन भारतीय ज्ञान परम्परा का महत्वपूर्ण अंग है और ज्ञान मनुष्य को भौतिक जगत में व्यवहार करना सिखाता है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. बबलू पाल ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. श्याम कुमार झा ने किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. कमलेश कुमार सिंह तथा विशिष्ट वक्ता वंदना झा, अध्यक्षा हिन्दी विभाग, जवाहरलाल विश्वविद्यालय थी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित