चेन्नई , फरवरी 09 -- अभिनेता से नेता बने विजय की फिल्म 'जन नायकन' को लेकर जारी सेंसर विवाद के बीच केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) ने सोमवार को कहा कि फिल्म को समीक्षा समिति के पास भेज दिया गया है। इसके साथ ही फिल्म के निर्माताओं ने मद्रास उच्च न्यायालय में दायर याचिका वापस लेने का निर्णय किया है।

फिल्म निर्माता की ओर से अधिवक्ता विजय सुब्रमणियन ने इस संबंध में उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में याचिका दायर की है, जिसे शीघ्र सुनवाई के लिए वापसी सूची में सूचीबद्ध किए जाने की संभावना है।

गौरतलब है कि विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' को पोंगल के अवसर पर नौ जनवरी को रिलीज होना था, लेकिन सेंसर प्रमाणन को लेकर उत्पन्न विवाद और उसके बाद कानूनी पेचिदगियों के चलते फिल्म की रिलीज टल गयी थी। सेंसर बोर्ड द्वारा पहले फिल्म को यू/ए प्रमाणपत्र दिए जाने के बाद बोर्ड के एक सदस्य ने इसे समीक्षा समिति को भेजने की सिफारिश की थी।

इसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा और उच्चतम न्यायालय ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए निर्माताओं को मद्रास उच्च न्यायालय से राहत लेने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें सीबीएफसी को फिल्म को प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया गया था। मामले को पुनः एकल न्यायाधीश के पास ताजा सुनवाई के लिए भेज दिया गया था।

सूत्रों के अनुसार समीक्षा समिति फिल्म का अवलोकन करेगी और कथित तौर पर इसमें मौजूद ऐसे दृश्यों पर विचार करेगी, जिन पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है। इसके बाद ही प्रमाणन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में कम से कम एक महीने का समय लग सकता है।

बताया गया है कि यदि अप्रैल में प्रस्तावित तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाती है, तो आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी और ऐसे में विजय की नयी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के मद्देनज़र फिल्म की रिलीज चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही संभव हो पाएगी।

उल्लेखनीय है कि मद्रास उच्च न्यायालय की प्रथम पीठ ने 27 जनवरी को सेंसर बोर्ड की अपील स्वीकार करते हुए एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया था और निर्माताओं को संशोधित याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा था कि सीबीएफसी को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था। इस बीच, फिल्म को समीक्षा समिति को भेजे जाने के बाद निर्माता अब उच्च न्यायालय में दायर याचिका वापस लेने जा रहे हैं।

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