जयपुर , मार्च 25 -- राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ किशनराव बागडे ने विद्यार्थियों के पत्रकारिता के अतीत के साथ हमारी गौरवमय ज्ञान परंपरा से जुडने पर जोर देते हुए कहा है कि पत्रकारिता में समाचार के साथ विचार संस्कृति की शिक्षा का भी प्रसार होना चाहिए।

श्री बागडे बुधवार को हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने आजादी के आंदोलन में पत्रकारिता की रही भूमिका के साथ गणेश शंकर विद्यार्थी, विजय सिंह पथिक, कर्पूर चंद्र कुलिश, बिशन सिंह शेखावत आदि को याद करते हुए पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा के प्रभावी प्रसार का आह्वान किया।

उन्होंने कहा "प्रेस की स्वतंत्रता का मैं पक्षधर हूं पर पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा में यह सीख भी दी जाए कि स्वतत्रंता स्वच्छंदता नहीं है।" उन्होंने स्वस्थ पत्रकारिता मूल्यों के लिए भावी पत्रकार तैयार किए जाने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा पूर्ण होने के बाद शिष्यों को सत्य, धर्म और विनम्रता का पालन करने की सीख दी जाती थी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्राप्त ज्ञान का अहंकार न करते हुए समाज के कल्याण के लिए उसका उपयोग करें।

श्री बागडे ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ आज भी हमें नैतिकता और जीवन मूल्यों की शिक्षा देते हैं। उन्होंने राजस्थान की पत्रकारिता परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सदैव सत्य को सामने लाना और समाज को जागरूक करना रहा है। यही रहना चाहिए।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि विश्वास अर्जित करने का भी क्षण है। यह जीवन का वह मोड़ है जहां से नई दिशा और जिम्मेदारी शुरू होती है। उन्होंने 1975 की आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाया गया लेकिन सशक्त पत्रकारिता ने सत्य की रक्षा की।

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