तिरुवनंतपुरम , फरवरी 24 -- कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर में कथित सोना तस्करी और अनियमितताओं को लेकर केरल विधानसभा में विरोध प्रदर्शन किया और सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।
यूडीएफ सदस्य सदन में अध्यक्ष के आसन के निकट एकत्र हो गए और नारेबाजी करते हुए तख्तियां दिखाईं, जिसके कारण विधानसभा अध्यक्ष ए. एन. शमशीर को शोर-शराबे के बीच प्रश्नकाल स्थगित करना पड़ा। गतिरोध में कोई सुधार न होने पर विपक्ष ने बाद में बहिर्गमन किया और देवस्वोम मंत्री वी. एन. वासन के इस्तीफे की अपनी मांग दोहरायी।
कांग्रेस विधायक के. बाबू ने कहा कि विपक्ष सदन के भीतर अपना असहयोग जारी रखेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूडीएफ ने कोई नया आरोप नहीं लगाया है, बल्कि केवल अदालत द्वारा की गई टिप्पणियों को दोहराया है। उन्होंने उन परिस्थितियों पर सवाल उठाया जिनमें मंदिर के पूजारी को 40 दिनों से अधिक समय तक जेल में रखा गया था और पूछा कि इस मामले के घटनाक्रम के लिए भक्तों को कौन जवाब देगा।
श्री बाबू ने पुजारी के खिलाफ कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि यह मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के उनके पहले के विरोध से जुड़ा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की ओर से हुई चूक के कारण सोना चोरी मामले के कई आरोपियों को जमानत मिल गई। उनके अनुसार, यदि देवस्वोम मंत्री निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होने तक पद छोड़ देते हैं, तो इस मुद्दे को सुलझाया जा सकता है और विधानसभा की सामान्य कार्यवाही फिर से शुरू हो सकती है।
मंत्री एम. बी. राजेश और पी. राजीव सहित सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने तथा मामले से जुड़े व्यक्तियों के बचाव में बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच कानून के अनुसार और न्यायिक निगरानी में आगे बढ़ रही है।
यह विवाद मंदिर की कीमती वस्तुओं से संबंधित कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है। कथित तौर पर मूर्तियों और दरवाजे के फ्रेम पर लगी सोने की परतों को उचित ऑडिट प्रक्रियाओं या अदालत की मंजूरी के बिना मरम्मत और दोबारा परत चढ़ाने के लिए हटाया गया था।
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