महासमुंद , फरवरी 03 -- छत्तीसगढ के महासमुंद जिले में धान खरीदी समाप्त होने के बाद भी जिन किसानों का धान नहीं बिक पाया है, वे अब आर-पार की लड़ाई के मन बनाते नजर आ रहे हैं।
ताजा मामला पिथौरा विकासखंड के अंतर्गत प्राथमिक कृषि साख समिति राजाडेरा का है, जहां सत्यापन के बावजूद लगभग 100 से अधिक किसानों का करीब छह हजार क्विंटल धान अब तक नहीं खरीदा गया है।
किसानों के अनुसार समिति से जुड़े 50 किसानों का एक बार भी टोकन नहीं कट पाया, जबकि 70 किसानों का टोकन एक बार कटने के बाद भी धान खरीदी नहीं हो सकी।
खून-पसीने की मेहनत से उगाए गए धान के नहीं बिकने से परेशान किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इसी आक्रोश के चलते ग्राम राजाड़ेरा, जम्हर, खुशरूपाली, गोड़बाहल, कोकोभाठा, छिबर्रा, कोचर्रा, अरण्ड, टेका, सोनासिल्ली, खुटेरी, कौहाकुड़ा, बरेकेल, पिथौरा सुखीपाली एवं बगारपाली सहित कई गांवों के किसान अपने-अपने धान को ट्रैक्टरों में लोड कर पिथौरा तहसील कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए।
धरनारत किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनका धान नहीं खरीदा जाएगा, वे तहसील परिसर में ही डटे रहेंगे। किसानों का आरोप है कि शासन की धान खरीदी व्यवस्था में लापरवाही के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
वहीं इस मामले में पिथौरा उपजिलाधिकारी बजरंग सिंह वर्मा ने बताया कि यह विषय शासन स्तर का है। किसानों से प्राप्त आवेदन को प्रशासन द्वारा शासन तक भेजा जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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