दरभंगा , जनवरी 31 -- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के विज्ञान संकायाध्यक्ष सह रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने शनिवार को कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में रसायन विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है।
विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग की ओर से 'मल्टीडिस्किपलिनरी एस्पेक्ट्स ऑफ केमिकल साइंसेस (आईसीएमएसीएस- 2026) विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह को संबोधित करते हुए सेमिनार के अध्यक्ष प्रो. दिलीप चौधरी ने कहा कि नए रासायनिक अनुसंधान, हरित और सतत रसायन विज्ञान शिक्षा, हरित और सतत रासायनिक विनिर्माण पद्धतियों और सामाजिक उत्तरदायित्व के भावना का अवसर, वर्तमान और भविष्य के रसायनशास्त्रियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हम सभी मिलकर पृथ्वी की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रसायन विज्ञान का प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और मानव स्वास्थ्य में व्यापक प्रभाव है और रसायन वैश्विक सतत विकास को समर्थन देने के लिए पहले से ही कई तरीकों से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की संगोष्ठियाँ का आयोजन रसायन विज्ञान में वर्णित लक्ष्य संबंधी चुनौतियों को हल करने के लिए एक मंच प्रदान करता हैं।
प्रो. चौधरी ने कहा कि रसायन विज्ञान का हमारे और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए उज्ज्वल भविष्य है। उन्होंने कहा कि रसायन विज्ञान अणुओं का विज्ञान है, जो सभी ज्ञात पदार्थों के मूलभूत निर्माण खंड हैं। एक तरह से यह रसायन विज्ञान को हर चीज का विज्ञान बनाता है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि मिथिला विश्वविद्यालय के भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. नौशाद आलम ने कहा कि भौतिकी, गणित और जीव विज्ञान जैसे अन्य प्रमुख विज्ञान विषयों के विपरीत, रसायन विज्ञान एकमात्र ऐसा मौलिक विज्ञान है, जिससे एक विशिष्ट उद्योग जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि रसायन शास्त्र एक विषय के रूप में मानवता की समृद्धि, खुशहाली और स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है और आज भी देता है। पिछले 5,000 वर्षों में, अन्य किसी भी विषय की तुलना में रसायन शास्त्र ने ही हमारी वैश्विक सभ्यता को संभव बनाया है।
प्रो. आलम ने कहा कि 21वीं सदी में भी रसायन विज्ञान तकनीकी परिवर्तन की दिशा निर्धारित करता रहेगा। रसायन विज्ञान के स्नातक तेजी से जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण निगरानी, फोरेंसिक विज्ञान, खाद्य विज्ञान और हरित रसायन विज्ञान जैसे क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। रसायन विज्ञान आधारित कंपनियां उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करती हैं, जो बदले में छात्रों को विज्ञान के क्षेत्र में बने रहने के लिए आकर्षित करती हैं।
समापन समारोह को डॉ. पीके झा ने भी संबोधित किया। तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों ने अपने-अपने आलेख पढ़े। रसायन विभाग के दो शोधार्थी गौरव और केशव कुमार को डॉ० नीलांबर चौधरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता में अभिजीत ने प्रथम, आनंद द्वितीय और वंशीधर ने तृतीय स्थान के रूप में सफलता प्राप्त की। समापन समारोह में डॉ. अभिषेक राय, डॉ. अनिरूद्ध शर्मा, डॉ. सोनू राम शंकर, डॉ. मोनी शर्मा एवं बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं रसायन विभाग के छात्र-छात्राएं शामिल थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित