नयी दिल्ली , दिसंबर 16 -- लोकसभा में विपक्षी दलों के सदस्यों ने 'निरसन और संशोधन विधेयक 2025' को समय की बर्बादी बताते हुए मंगलवार को कहा कि इसमें कई विधेयक इसी सरकार ने पारित किए हैं और अब उन्हें खत्म किया जा रहा है। विपक्षी सदस्यों ने यह भी कहा कि सरकार को लोगों को समय पर न्याय देने की पहल करनी चाहिए और इसके लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति की जानी चाहिए।

कांग्रेस के एडवोकेट डीन कुरियाकोस ने 'निरसन और संशोधन विधेयक 2025' पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि औपनिवेशिक काल के कानूनों को खत्म करने के बहाने पूरी तरह से मनमानी की जा रही है। इसमें शामिल जितने विधेयक पारित हो रहे हैं उनमें से कुछ पिछले साल ही पारित हुए हैं। इससे साफ है कि सरकार सिर्फ संसद का समय बर्बाद करने का काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को लोगों को शीघ्र न्याय देने की पहल करनी चाहिए और इसके लिए न्यायिक व्यवस्था में सुधार के कदम उठाए जाने चाहिए। न्यायाधीशों की कमी को दूर किया जाना चाहिए।

भाजपा के मनोज तिवारी ने विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि जब कानून भ्रम जाल बनता है तो संशोधन आवश्यक हो जाता है। उनका कहना था कि न्यायालयों में मामलों में देरी हो रही है और यदि सरकार चाहती है कि लोगों को समय पर न्याय मिले और उलझाने वाले कानूनों को खत्म कर अन्य कई कानूनों में संशोधन किया जा रहा है तो इसमें किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस निरसन विधेयक में चार विधेयक ऐसे शामिल किए गये हैं जिनको संशोधित किया जा रहा है और अन्य विधेयकों को निरस्त करने का प्रस्ताव किया गया है।

समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि पहले जो विधेयक चर्चा के लिए सदन में आते थे उन पर संसदीय समितियों में चर्चा होती थी लेकिन मोदी सरकार बुलेट ट्रेन पर बैठकर विधेयक पारित करवा रही है और वह सारे विधेयक जल्दबाजी में संसद में पेश कर पारित करना चाहती है। इसमें से कई विधेयक इसी मोदी सरकार के पहले पारित कराए हैं लेकिन अब कहा जा रहा है कि उनकी कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने इसे सरकार की विधेयक पारित कराने की जल्दबाजी बताया और कहा कि सरकार की नीति सुनिश्चित नहीं है और वह किसी भी विधेयक को विचार विमर्श के बाद नहीं लाती है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को संसदीय समिति को भेजना चाहिए और इसमें बेहतर संशोधन करके फिर इस विधेयक को संसद में लाया जाना चाहिए।

द्रमुक के डॉ कलानिधि वीरास्वामी ने कहा कि सरकार संसद में बहुमत में है और उसी का फायदा उठाकर इस जल्दबाजी में विधेयक लाकर उनको पारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार विधेयकों को पूरी तैयारी के साथ संसद में लाती है और जो विधेयक सदन में लाए जा रहे हैं उनको समितियों को नहीं भेज रही है इसलिए जो विधेयक इसी सरकार में पारित हुए हैं उनको खत्म किया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार के पास बहुमत है और बहुमत के बल पर नियम और विनियम की परवाह नहीं की जा रही है और मनमानी कर संवैधानिक व्यवस्था का ध्यान रखे बिना विधेयकों को पास करवा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह जो विधेयक संसद में ला रही है उस पर विपक्ष से चर्चा करे और देशहित में एक समग्र और पूर्ण विधेयक संसद में लाये। विधेयकों को जल्दबाजी में नहीं लाया जाना चाहिए और विधेयकों के नाम हिंदी में नहीं होने चाहिए।

तेलुगु देशम पार्टी के श्रीभरत मुतुकुमिल्ली ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार जो भी नया कानून बनाती है या पुराने कानूनों को बदलती है उसकी बुनियाद में समाज की जरूरत और उसका हित होता है। उनका कहना था कि सरकार का मकसद काम को आसान बनाना है और जिन कानूनों से उलझन पैदा होती है उनको हटाना जरूरी होता है इसलिए इन कानूनों को खत्म करने का विधेयक लाकर सरकार जनता के हित में बड़ा कदम उठा रही है और सबको इसका स्वागत करना चाहिए। जिन कानूनों की जरूरत नहीं है उनको हटाने की पहल करना सरकार का सही कदम है।

तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में बड़ी संख्या में लोगों के मामले लंबित पड़े हुए हैं और इसका समाधान होना चाहिए और इसके लिए देश को ज्यादा न्यायाधीशों की जरूरत है। इसी तरह की स्थिति हाईकोर्ट तथा जिला अदालतों में है लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है और न्यायाधीशों की नियुक्ति के कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को देश के भविष्य के लिए कदम उठाने चाहिए क्योंकि लोगों का न्यायिक व्यवस्था से विश्वास कमजोर पड़ने लगा है और सरकार को इस विश्वास की बहाली क लिए कदम उठाने चाहिए।

जनता दल यू के कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण है और ऐसा कर सरकार उन विधेयकों को खत्म कर रही है जिनकी अब जरूरत ही नहीं है। इस विधेयक के जरिए आपदा की दिक्कतों को दूर करने के ज्यादा प्रावधान किए गये हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित