नयी दिल्ली , मार्च 25 -- केंद्र सरकार ने बुधवार को 28,840 करोड़ रुपये की लागत से 10 साल की 'संशोधित उड़ान' योजना को मंजूरी प्रदान की जिसके तहत देश में 100 नये हवाई अड्डों और 200 आधुनिक हेलीपोर्ट का निर्माण किया जायेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गयी।
उल्लेखनीय है कि छोटे तथा मझौले शहरों को देश के हवाई नेटवर्क में शामिल करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस) 'उड़ान' की शुरुआत साल 2016 में की गयी थी और पहली फ्लाईट दिल्ली से शिमला के बीच अप्रैल 2017 में शुरू हुई थी। इसके तहत 95 नये हवाई अड्डों की शुरुआत की गयी है जिनमें ज्यादातर पुरानी हवाई पट्टियों और उपेक्षित हवाई अड्डों को विकसित करके बनाये गये हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि उड़ान योजना में 1.62 करोड़ लोगों ने रियायती दरों पर यात्रा की है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 के लिए मंजूरी नयी योजना में चार करोड़ यात्रियों का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि आठ साल में 100 नये हवाई अड्डों का विकास चैलेंज मोड में किया जायेगा। राज्य बतायेंगे कि किन शहरों को शामिल करना चाहते हैं। उसके लिए जमीन, वन एवं पर्यावरण संबंधी मंजूरी आदि मुहैया कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी। केंद्र सरकार हवाई अड्डों के विकास के लिए कुल 12,159 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता देगी। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि सभी 100 हवाई अड्डे पुरानी हवाई पट्टियों को विकसित करके ही बनाये जायेंगे। इससे 120 नये शहर 'उड़ान' में शामिल होंगे।
'उड़ान' हवाई अड्डों के संचालन एवं रखरखाव के लिए केंद्र सरकार पहले तीन साल अधिकतम 3.06 करोड़ रुपये सालाना प्रति हवाई अड्डा मदद देगी। प्रत्येक हेलीपोर्ट या वाटरड्रम के लिए सालाना 90 लाख रुपये की मदद तीन साल तक मिलेगी। अगले आठ साल में इस मद में 2,577 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है।
आठ साल में कुल 200 नये हेलीपोर्ट के निर्माण की भी योजना है। हर हेलीपोर्ट के लिए 15 करोड़ रुपये की मदद दी जायेगी। इस पर 3,661 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है।
उड़ान में अधिकतम किराया सीमित होने से विमान सेवा कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 10 साल में 10,043 करोड़ रुपये का आवंटन किया जायेगा। पहले दो साल रूट आवंटन के समय तय वीजीएफ का शत प्रतिशत दिया जायेगा। बाद में तीसरे चौथे और पांचवें साल में वीजीएफ कम किया जायेगा और इसके बाद इसे समाप्त कर दिया जायेगा।
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