वाराणसी , फरवरी 1 -- काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अजित चतुर्वेदी ने कहा कि संत श्री गुरु रविदास संवैधानिक मानवतावाद के अग्रदूत थे। उनकी शिक्षाएं समाज के समग्र के उत्थान के लिए आज भी प्रासंगिक हैं।
संत रविदास के 649वी जयंती के अवसर पर के.एन. उडप्पा सभागार में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संत रविदास सबके हैं उन्हें किसी जाति विशेष के दायरे में नहीं रखा जा सकता। मुख्य वक्ता प्रो सदानंद शाही ने अपने उद्बोधन में कहा कि पराधीनता का बोध और पराधीनता से मुक्ति की आकांक्षा ही गुरु रविदास की शिक्षाओं का मूल है। उन्होंने कहा देश की सामाजिक संरचना में मौजूद विषमता ही पराधीनता का मूल स्रोत है। इसलिए सच्ची स्वाधीनता तब तक संभव नहीं है जब तक समानता स्थापित न हो जाए।
"संवैधानिक मानवतावाद और गुरु रविदास की शिक्षाओं" विषयक संगोष्ठी को चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो एस.एन. शंखवार, प्रो आर के गौतम, प्रो रानी सिंह, डॉ. पंकज भारती, डॉ के.एस. माने आदि ने संबोधित किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. महेश प्रसाद अहिरवार ने की, स्वागत भाषण एवं विषय प्रवर्तन प्रो. सुजाता गौतम ने किया।
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