मुंबई , जनवरी 05 -- राज्यसभा सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर पुलिस का इस्तेमाल करके उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के एक चुनाव उम्मीदवार को शिंदे से मिलने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। श्री शिंदे ने उम्मीदवार को नगर निगम चुनाव के लिए अपना नामांकन वापस लेने के लिए 'मजबूर' किया।
श्री राउत का कहना है कि जिन लोगों में चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं होती है वही ऐसा करते हैं। उन्होंने श्री शिंदे को 'पीठ पीछे छुरा घोंपने' की बजाय 'सामने से खुलकर लड़ने' की चुनौती दी।
श्री राउत ने कहा, "अगर एकनाथ शिंदे में थोड़ी भी हिम्मत होती, तो वह ऐसे काम नहीं करते लेकिन वह पूरी जिंदगी लोगों की पीठ में छुरा घोंपते रहे हैं। अब वह असली शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) से इतने डरे हुए हैं कि वह उनके उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से भी रोकते हैं। यह सब साबित करता है कि वह हमसे डरे हुए हैं। सत्ताधारी पार्टी इस भ्रम में है कि मुंबई और ठाणे के वोटर 15,000 रुपये लेकर या अपने उम्मीदवारों का अपहरण करके अपना मन बदल लेंगे। ऐसी गंदी राजनीति से लोग बहुत गुस्से में हैं और यह गुस्सा निश्चित रूप से मतपेटी के जरिए दिखेगा।"इससे पहले मतदान शुरू होने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले 68 महायुति उम्मीदवारों के 'निर्विरोध जीतने' की खबरों के बाद राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे के नेता अविनाश जाधव ने एक वीडियो जारी किया और दावा किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के उम्मीदवार विक्रांत घाग को एक पुलिस अधिकारी जबरदस्ती उपमुख्यमंत्री शिंदे के आवास पर ले गया, जिसके बाद घाग ने अपना नामांकन 'वापस' ले लिया।
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