मुंबई , अप्रैल 08 -- शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि भारत की वैश्विक साख कमजोर हुई है, जबकि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष में मध्यस्थता कर अपनी भूमिका मजबूत की है।

श्री राउत ने इस स्थिति को "शर्मनाक" बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना की और कहा कि देश का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मंच पर निर्णायक भूमिका निभाने में विफल रहा है। उन्होंने विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर पर भी निशाना साधते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की।

हालिया संघर्ष का जिक्र करते हुए श्री राउत ने कहा कि ईरान ने अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली देशों के खिलाफ एक महीने से अधिक समय तक मजबूती से डटे रहकर अपनी क्षमता दिखाई। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष ने इन वैश्विक शक्तियों के प्रति बनी धारणा को भी चुनौती दी है।

श्री राउत के अनुसार, जहां अंततः अमेरिका को शांति स्थापित करने का श्रेय मिला, वहीं चीन और पाकिस्तान को भी उनकी भूमिकाओं के लिए मान्यता मिली। उन्होंने कहा कि भारत को यह कूटनीतिक लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय नीति के अभाव में ऐसा नहीं हो सका।

प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए श्री राउत ने आरोप लगाया कि जब वैश्विक तनाव बढ़ रहा था, तब केंद्र सरकार घरेलू राजनीति में व्यस्त रही। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रभावशीलता घटने का भी आरोप लगाया।

इस्लामाबाद में संभावित शांति बैठक की खबरों पर भी उन्होंने टिप्पणी करते हुए इसे भारत की छवि के लिए झटका बताया और कहा कि पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता केंद्र की नीतियों का परिणाम है।

श्री राउत ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन जैसे संघर्ष अब भी जारी हैं, जबकि पहले इन्हें रोकने के दावे किए गए थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत का नेतृत्व अब केवल वैश्विक नेताओं से फोन पर बातचीत तक सीमित रह गया है, जिसका कोई ठोस परिणाम नहीं दिख रहा।

विदेश मंत्री पर तीखी टिप्पणी करते हुए श्री राउत ने कहा कि उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि उन्होंने विरोधियों को कम आंकते हुए भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाया है।

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